एक पल को हम लोग अपने बचपन और उस दुनिया में खो गए, जहां से होते हुए हम लोग कला की दुनिया में आए थे।

जर्मनी के प्रख्यात विद्वान प्रो. उलरिच बर्क ने इस अवसर पर वैज्ञानिक विचारों के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक सहयोग के लिए ऐसे सम्मेलनों के महत्व को रेखांकित किया।