रामायण की कथा तो हजारों साल पुरानी है, लेकिन रावण पुतला दहन की परंपरा को व्यापक रूप से मान्यता स्वतंत्रता के बाद ही मिली.

एडीएम सिटी योगानंद पांडे ने इसको लेक स्पष्ट किया कि रावण दहन इस बार गैर पारंपरिक रूप में होना था, इसलिए इसे अनुमति नहीं दी गई है.