Dussehra: रावण पुतला दहन सबसे पहले कहां और कब हुआ? पढ़ें दशहरे से जुड़ी रोचक जानकारी
Dussehra Ravan Dahan Interesting Facts: भारत में हर साल आश्विन शुक्ल दशमी को विजय दशमी यानी दशहरे का त्योहार मनाया जाता है. इस बार यह त्योहार कल यानी 2 अक्तूबर को मनाया जाएगा. यह त्योहार वर्षा ऋतु की समाप्ति और शरद ऋतु के आगमन का सूचक माना जाता है. इस दिन पूरे देश में रावण का पुतला दहन होता है. दरअसल त्रेता युग में इस दिन भगवान राम के हाथों लंका के राजा रावण का वध किया गया. इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है और संकेत रूप में रावण का पुतला दहन किया जाता है.
दशहरे पर बड़ी संख्या में लोग रामलीला मैदानों में जुटते हैं और मंच पर आयोजित रामलीला का प्रदर्शन देखने के साथ ही रावण का विशाल पुतला दहन की नजारा भी देखते हैं. इस दिन पूरे भारत में लगभग एक सा ही नजारा दिखाई देता है. यह परंपरा अब देश भर में आम हो चुकी है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रावण के पुतले को जलाने की शुरुआत सबसे पहले कब और कहां से हुई और ये परम्परा कैसे पड़ी?
भले ही यह त्योहार आज भारतीय सांस्कृतिक रंगों से भरा हुआ है, लेकिन इसकी जड़ें अधिक पुरानी नहीं हैं. रामायण की कथा तो हजारों साल पुरानी है, लेकिन रावण पुतला दहन की परंपरा को व्यापक रूप से मान्यता स्वतंत्रता के बाद ही मिली.
दशहरा क्यों?
सबसे पहले यहां ये जानते हैं कि दशहरा क्यों मनाया जाता है? शास्त्रों के मुताबिक, त्रेता युग में इसी दिन भगवान राम ने रावण का अंत किया था. इसीलिए इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. रावण का पुतला दहन कर समाज को यह संदेश दिया जाता है कि चाहे अहंकार, अन्याय या अत्याचार कितना भी बड़ा क्यों न हो, अंत उसका भी होता है और सच्चाई और अच्छाई की जीत हमेशा होती है.
कहां हुआ था सबसे पहला रावण दहन?
हालांकि इस सवाल को लेकर कोई एक निश्चित जवाब नहीं है, लेकिन तमाम इतिहासकारों व जानकारों की बात अगर मानें तो सबसे पहला रावण दहन वर्तमान के राज्य झारखंड की राजधानी रांची में हुआ था. उस समय यह बिहार का हिस्सा हुआ करता था. यह घटना साल 1948 की मानी जाती है. कहा जाता है कि उस समय पाकिस्तान से आए शरणार्थी परिवारों ने इस आयोजन की शुरुआत की थी. शुरु में तो ये आयोजन छोटा था, लेकिन धीरे-धीरे इसने बड़ा रूप ले लिया और फिर पूरे देश में इसका आयोजन होने लगा.
दिल्ली में हुई शुरुआत
कुछ जानकारों की मानें तो पहली बार रावण का पुतला देश की राजधानी दिल्ली में 17 अक्टूबर 1953 को जलाया गया था. ये कार्यक्रम रामलीला मैदान में हुआ था. इस कार्यक्रम में रावण का पुतला कागज या लकड़ी का नहीं, बल्कि कपड़ों से तैयार किया गया था. शुरुआती वर्षों में यह कार्यक्रम सीमित स्तर पर होता था, लेकिन आज यह दिल्ली के सबसे बड़े आयोजनों में से एक माना जाता है.
नागपुर की रोचक कहानी
नागपुर शहर में रावण दहन को लेकर एक कहानी प्रचलित है कि जब पहली बार रावण का पुतला यहां पर तैयार किया गया, तब उसकी ऊंचाई 35 फीट रखी गई थी. चूंकि तब के समय में क्रेन या आधुनिक साधन जैसी कोई चीज नहीं थी. इसलिए पुतले को खड़ा करने के लिए बड़ी सी सीढ़ी का इस्तेमाल किया गया और करीब 50 लोग उस पर चढ़े थे. बताया जाता है कि 100 से अधिक लोग नीचे से रस्सियों की मदद से पुतले को संभाल रहे थे. इस आयोजन को सफल बनाने में कई लोगों ने दिन-रात मेहनत की थी.
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं कुछ लेखों व सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. khabarsting इसकी पुष्टि नहीं करता है. इस पर किसी तरह का अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.
ये भी पढ़ें-Ayodhya Ramleela: अयोध्या में नहीं होगा रावण दहन…जिला प्रशासन और रामलीला समिति में ठनी
Vijaya Dashami Wishes: ‘पर्व दशहरा आज है, राम नाम का शोर…’ विजयदशमी पर ये भेजें शुभकामना संदेश