UGC एक्ट पर घमासान तेज…DU में ब्राह्मण महिला पत्रकार की जमकर पिटाई; दी गई रेप की धमकी, रुचि तिवारी पर भी लगे गम्भीर आरोप-Video

February 15, 2026 by No Comments

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UGC ACT Protest Ruchi Tiwari Case: सोशल मीडिया पर दो दिन से रुचि तिवारी को लेकर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं. दरअसल रुचि तिवारी एक पत्रकार हैं और उनके मुताबिक, वह कल DU में कवरेज के लिए गई थीं, इसी दौरान एक शख्स ने उनसे पूछा कि वो कौन हैं? इस पर उन्होंने बताया कि वह ब्राह्मण है तो उनके ऊपर एक पूरा ग्रुप टूट पड़ा और उनके कपड़े फाड़े गए व उनको रेप की धमकी भी दी गई. हालांकि सोशल मीडिया पर रुचि तिवारी पर हुए हमले को लेकर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं.

इसी बीच दूसरे पक्ष ने रुचि तिवारी पर आरोप लगाया है कि रुचि ने पहले एक छात्रा को जमीन पर पटका और जब उन्होंने ऐसा व्यवहार किया, इसी के बाद उनको सबक सिखाने के लिए ये स्टेप उठाया गया. बता दें कि देश के तमाम हिस्सों में यूजीसी के नए एक्ट को लेकर सवर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इसी क्रम में DU (दिल्ली विश्वविद्यालय) के नॉर्थ कैंपस के आर्ट्स फैकल्टी में एक कार्यक्रम AISA की छात्राएं आयोजित कर रही थीं.

इस कार्यक्रम का नाम ‘अधिकार रैली’ था, जिसमें कई प्रोफेसरों और अन्य वक्ताओं को UGC के नए नियमों पर चर्चा के लिए बुलाया गया था ताकि यूजीसी के नए नियमों को लेकर चर्चा हो सके. तभी ये विवाद हो गया जो कि इतना बढ़ा कि सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय हो गया. फिलहाल रुचि तिवारी को पुलिस के हस्तक्षेप के बाद छुड़ाया गया. इसके बाद रुचि तिवारी ने बताया कि ब्राह्मण होने की वजह से उनको पीटा गया और उनसे बदसलूकी की गई. इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग कई वीडियो वायरल हो रहे हैं. फिलहाल ये खबर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और खबरों के आधार पर लिखी गई है. इसकी पुष्टि खबर स्टिंग नहीं करता.

जानें क्या है यूजीसी एक्ट

बता दें कि हाल ही में यूजीसी ने नई गाइडलाइन जारी की है जिसमें कहा गया है कि हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में एक इक्विटी समिति का गठन किया जाएगा जो एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को रोकेगी और आरोपी के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा. इस एक्ट को लेकर सवर्णो के संगठनों का कहना है कि जिस तरह से एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग कर झूठे मुकदमें ब्राह्मण व सवर्ण समाज पर दर्ज किए जा रहे हैं, इसी तरह यूजीसी के इस नए एक्ट का भी इस्तेमाल होगा?

इससे शिक्षण संस्थान में स्वस्थ्य मानसिकता के साथ पढ़ाई नहीं हो सकेगी और सवर्णों के बच्चों को झूठे मुकदमें में फंसा दिया जाएगा. इसी के साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि इस एक्ट में सवर्णों को पीड़ित नहीं बल्कि पहले से ही आरोपी घोषित कर दिया गया है. दुर्व्यवहार तो किसी के साथ भी हो सकता है. मांग की जा रही है कि या तो इसमें सवर्णों के बच्चों को भी पीड़ित होने पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने की बात शामिल की जाए या तो इसे खत्म किया जाए. फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है और कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है और आगे इस पर सुनवाई होनी है.

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