UP:आखिर कैसे पूरा हो प्रधानमंत्री के “स्वच्छ भारत” का सपना, जब उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा स्कूलों में सफाई कर्मचारी ही नहीं, फिलहाल शिक्षकों ने ही थाम रखी है “झाडू”, सवाल ये कि क्या-क्या करें शिक्षक, देखें वीडियो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा का बुरा हाल इसी से पता चल सकता है कि यहां एक सफाई कर्मचारी भी नहीं है। जहां एक ओर प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत अभियान के तहत लोगों को साफ-सफाई की शिक्षा दे रहे हैं तो वहीं उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा के स्कूलों में सफाई कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि स्कूलों की साफ-सफाई कौन करे। फिलहाल तो शिक्षक ही इस कार्य को कर रहे हैं। स्कूल बंद होने के बाद शिक्षक स्कूल को साफ करते हैं, ताकि दूसरे दिन बच्चों को किसी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े।
बता दें कि बेसिक स्कूल के शिक्षकों के ऊपर केवल बच्चों को पढ़ाने का ही नहीं बल्कि बीएलओ, पोलियो, चुनाव सहित तमाम गैर शैक्षणिक कार्य करने की जिम्मेदारी भी सौंपी जाती रही है। अब इन कार्यों में साफ-सफाई का भी काम जुड़ गया है। इसी के साथ शिक्षकों को तमाम कागजी कार्य करने में भी लगाया जा रहा है। एक तो पहले से ही परिषदीय विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। उस पर से एक शिक्षक से तमाम कार्य कराए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि शिक्षक बच्चों को पढ़ाए या फिर बाबूगिरी करे।
मालूम हो कि हर साल बेसिक शिक्षा विभाग के लिए सरकार करोड़ों का बजट पास करती है। फिर भी इसकी व्यवस्थाओं और शिक्षा के स्तर में सुधार नहीं हो पा रहा है। वजह साफ है। एक तो स्कूलों में मानक के अनुसार शिक्षक नहीं हैं। दूसरे जो शिक्षक हैं तो उनको गैर शैक्षणिक कार्य में लगाया जाता है। आश्चर्य की बात तो ये है कि किसी-किसी स्कूल में केवल एक ही शिक्षक है या फिर केवल शिक्षामित्र के भरोसे ही स्कूल संचालित हो रहा है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि भला एक शिक्षक कितनी कक्षाओं में एक ही समय पर अलग-अलग विषयों की शिक्षा दे सकेगा और पाठ्यक्रम के अनुसार कोर्स पूरा करा सकेगा। ऐसे में अगर सरकार ये अपेक्षा करती है कि बेसिक स्कूल के बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिले और यहां के बच्चे भी डाक्टर, इंजीनियर या ऑफिरस बने, तो ये भला कहां से मुमकिन है। फिलहाल तो बेसिक शिक्षा के स्कूलों में सफाई कर्मचारी के साथ ही एक बाबू की जरूरत महसूस की जा रही है ताकि शिक्षक केवल बच्चों को पढ़ाए।
नहीं दिया गया मानदेय
बता दें कि बेसिक शिक्षा के स्कूलों में पहले सफाइ कर्मचारी हुआ करते थे, लेकिन जैसे-जैसे वो रिटायर होते गए, तो नए कर्मचारी नहीं रखे गए। दूसरे जिन स्कूलों में सफाई कर्मचारी हैं भी तो उनको कई-कई महीने से मानदेय ही नहीं मिला है। इस कारण वो स्कूल ही नहीं आते। बता दें कि सफाई कर्मचारियों को केवल 400 रुपए मानदेय दिया जाता है, जो कि महीनों से नहीं मिला है।