UP MDM: यूपी के तमाम जिलों में बंदी की कगार पर पहुंची मिड डे मील योजना, अप्रैल से नहीं मिली कन्वर्जन कॉस्ट, ग्राम प्रधानों का नहीं सहयोग, निजी खर्च करने वाले शिक्षकों ने खड़े किए हाथ, मानदेय को तरस रहे रसोइयां, जानें क्या रहा मंत्री जी और अधिकारियों का रवैया
लखनऊ/कानपुर। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में मिड डे मील की बड़ी योजना को सुचारू रूप से संचालित करने के योगी सरकार के तमाम दावे खोखले ही नजर आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के तमाम ऐसे जिले हैं, जिनको अप्रैल महीने से कन्वर्जन कास्ट का पैसा नहीं मिला है।
इसकी वजह से शिक्षकों को अपनी जेब से पैसा खर्च कर नमक, तेल, मसाले,सब्जी, ईंधन आदि का इंतजाम करना पड़ रहा है, लेकिन महीनों से पैसा खर्च कर परेशान हो चुके शिक्षकों ने अब हाथ खड़े कर दिए हैं तो वहीं इस पूरी योजना के लिए अधिकांश स्थानों पर ग्राम प्रधान द्वारा भी कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। दूसरी ओर रसोइयां भी परेशान है, उसका मानदेय महीनों से नहीं दिया गया है।
इस पूरे मामले को लेकर जब मिडडेमील निदेशक से फोन पर बात करनी चाही तो नम्बर बंद मिला तो वहीं वित्त नियंत्रक को फोन मिलाया गया तो फोन नम्बर ही उपलब्ध नहीं था, इस पर जब बेसिक शिक्षा मंत्री से इस सम्बंध में बात करनी चाही तो उनका फोन उठा ही नहीं। फिलहाल उन सबके चक्कर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जमकर भद्द पिट रही है। शिक्षक उनकी ही कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं तो वहीं रसोइया भी मानदेय (2000) न मिलने पर सरकार को ही दोषी ठहरा रही है।
एक बानगी
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले को ही ले लीजिए। यहां फल वितरण मद में 2022-23 में अद्यतन कोई धनराशि आवंटित नहीं की गई है। इसकी वजह से जिले के शिवराजपुर, पतारा, कल्याणपुर एवं ककवन आदि विकास खंडों में योजना प्रभावित भी हो रही है। ग्राम प्रधान इस मामले में जरा भी सहयोग नहीं कर रहे हैं।
इस पर शिक्षक अपने निजी खर्चों से बच्चों को भोजन, दूध, फल आदि की व्यवस्था करा रहे हैं। इस तरह से कई विद्यालयों की देयता करीब एक लाख से ऊपर हो गई है। अगर जल्द से जल्द कन्वर्जन कास्ट नहीं मिली तो योजना पूरी तरह से प्रभावित हो जाएगी। बता दें कि मिड डे मील के लिए सरकार द्वारा गेहूं और चावल दिया जाता है। गेंहू को साफ करवाके पिसवाने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और शिक्षकों की होती है। यह कार्य स्कूल में ही किया जाता है।
वहीं तेल, मसाले, नमक, सब्जी, बुधवार के दूध व ईंधन आदि का बंदोबस्त कन्वर्जन कास्ट से ही किया जाता है, जो कि अप्रैल महीने से इस जिले को नहीं मिला है। यहां बता दें कि प्राइमरी में 4 रुपए 97 पैसे प्रति बच्चा कन्वर्जन कॉस्ट दी जाती है तो वहीं जूनियर में प्रति बच्चा 7रुपए 45 पैसे मिलते हैं। इसी तरह औरैया का भी हाल है। हालांकि अगस्त माह में उन्नाव को कन्वर्जन कॉस्ट मिल गई है। फिलहाल इसी तरह की स्थिति कुछ अन्य जिलों में भी बनी हुई है। यह खासकर वहां है, जहां अक्षय पात्र द्वारा खाना वितरित नहीं किया जा रहा है।