UP: नेतागिरी चमकाने के लिए उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष ने परेशान बेसिक शिक्षकों के घाव को दिया कुरेद, तो शिक्षकों ने दिया पलट कर जवाब, पूछा कहां लिखी स्थानान्तरण की बात, केवल अपना हित साध रहे हैं, देखें पूरा मामला

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश (UP) बेसिक शिक्षकों के बीच नेतागिरी चमकाने के लिए उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चंद्र शर्मा ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उन्होंने महानिदेशक स्कूली शिक्षा से स्थानान्तरण नीति को शीघ्र जारी करने व पदोन्नति को लेकर मांग रखी है। इसी के साथ उन्होंने विजय किरन आनन्द के साथ फोटो खींचा कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। साथ ही उस ज्ञापन को भी वायरल कर दिया, जिसमें दावा किया गया कि स्थानान्तरण को लेकर मांग रखी गई है। इस पर शिक्षकों ने उसी ज्ञापन को फिर से वायरल करते हुए शर्मा को आड़े हाथ लेते हुए सोशल मीडिया पर ही पूछ लिया कि इसमें कहां लिखी है ट्रांसफर की बात।

बता दें कि सालों से जनपद व ब्लाक के अंदर ट्रांसफर की मांग कर रहे शिक्षकों की भावनाओं से खुल कर खेल रहे शिक्षक नेता ने जब सोमवार को हद पार कर दी तो शिक्षकों ने भी इसका मुंह तोड़ जवाब देते हुए आइना दिखा दिया। बता दें कि जो ज्ञापन शर्मा द्वारा वायरल किया गया है, उसमें सिर्फ पदोन्नति की ही मांग लिखी गई है, लेकिन शिक्षकों के बीच नेतागिरी चमकाने के लिए चक्कर में उन्होंने यह भी कह दिया कि उन्होंने स्थानान्तरण की भी बात रखी, क्योंकि इसस्य उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षकों के बीच सबसे बड़ा मुद्दा स्थानान्तरण का है। गत वर्ष भी इस मुद्दे को लेकर पूर्व बेसिक शिक्षा मंत्री के कई बार बयान सामने आ चुके थे जो बाद में झूठे ही साबित हुए। हालांकि वर्तमान बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने जुलाई में स्थानान्तरण पर आदेश जारी करने की बात कही है। अब देखना ये है कि संदीप सिंह शिक्षकों से किया वादा पूरा कर पाते हैं या नहीं। फिलहाल गत 13 सालों से जनपद व ब्लाक के अंदर ट्रांसफर न होने के कारण शिक्षक, खासकर महिलाएं व दिव्यांग शिक्षक खासे परेशान हैं। उन्हें अपने ही गृहजनपद में 150 से 200 किलोमीटर दूर पढ़ाने जाना पड़ रहा है।

सबसे पहले निपटेंगे शिक्षक नेता
कुछ शिक्षकों का कहना है कि अगर जनपद व ब्लाक के अंदर ट्रांसफर होता है तो सबसे पहले शिक्षक नेता ही निपटेंगे और इनको पिछड़े ब्लाकों में भेजा जाएगा। क्योंकि पिछले 13 सालों से ये सभी अगड़े ब्लाकों व सुविधाजनक स्कूलों में तैनात है। नेताओं को मालूम है कि अगर स्थानान्तरण होता है तो सबसे पहले इन पर ही गाज गिरेगी। इसीलिए ये पुरजोर तरीके से स्थानान्तरण की मांग को अधिकारियों व मंत्रियों के सामने नहीं रख रहे हैं, लेकिन गाहे-बगाहे दावा करते रहते हैं कि इन्होंने स्थानान्तरण की बात कही, ताकि इनकी नेतागिरी चलती रहे।