सरकारी स्कूल की किताबें कबाड़ी को बेची …BSA ऑफिस के 4 कर्मचारी गिरफ्तार और कई बर्खास्त-Video

February 23, 2026 by No Comments

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Bahraich: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें साफ दिख रहा है कि ट्रक भर कर किताबें रद्दी की तरह पड़ी हुई है. सोशल मीडिया पर वायरल खबरों के मुताबिक, यह वीडियो उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले का है और कूड़े में पड़ी ये किताबें सरकारी स्कूलों की हैं. ये किताबें सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बांटने के लिए आई थी लेकिन कुछ कर्मचारियों की मिली भगत से इसे कबाड़ी को बेच दिया गया.

वायरल खबरों में दावा किया जा रहा है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी के कुछ कर्मचारियों के मिलीभगत से 4 रुपये किलो में ये किताबें कबाड़ी को बेची गई हैं. हालांकि पुलिस ने छापा मारकर 13 हजार किताबें बरामद कर ली है तो वहीं वीडियो वायरल होने के बाद कबाड़ी सहित BSA ऑफिस के 4 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है और कईयों को बर्खास्त कर दिया गया है. तो वहीं अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है. साथ ही किताबों से भरा कंटेनर कबाड़ी के यहां से वापस मंगवा लिया गया है. बता दें कि इस वीडियो को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी पोस्ट किया है और योगी सरकार पर निशाना साधा है.

उत्तराखंड भेजी जानी थी किताबें

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक किताबों को बच्चों को बांटने के बजाए कबाड़ी के जरिए उत्तराखंड भेजी जाने वाली थी. इसके लिए उसे कंटेनर पर लादा गया था लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और किताबों से भरे कंटेनर को लखीमपुर खीरी से वापस मंगवाया गया है. इस मामले में आगे की जांच जारी है.

Government school books sold to junk dealer 4 BSA office employees arrested--

पुलिस के साथ आरोपी

ये गिरफ्तार किए गए

इस मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के चतुर्थश्रेण कर्मचारी आलोक मिश्रा के साथ ही कबाड़ी दिलशाद, शुभांकर गुप्ता और अर्जुन को गिरफ्तार किया गया है. तो वहीं बीएसए कार्यालय के कर्मचारी आशुतोष सिंह, दीपक कुमार, अतुल सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है. साथ ही ब्लॉक ऑफिसर डॉली मिश्रा और अकाउंट ऑफिसर वीरेश वर्मा पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है. इसके लिए सरकार को चिट्ठी लिखी गई है.

इस मामले में थाना रामगांव में केस दर्ज किया गया गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया है. इस पूरे प्रकरण में दो अनुचर पहले ही सस्पेंड किए गए हैं. साथ ही अनुदेशक, जिला समन्वयक, स्पेशल एजुकेटर की संविदा को खत्म कर दिया गया है. इसके अलावा बहराइच के लेखाधिकारी और बीईओ नगर भी जांच के घेरे में हैं. उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है.

डीएम अक्षय कुमार त्रिपाठी की ओर से मामले की जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया है. बता दें कि इस मामले में सबसे पहले डीएम को सीयूजी पर किसी ने शिकायत की थी. ये किताबें सरकारी विद्यालयों की शैक्षणिक सत्र 2026-27 में वितरित करने से लिए आई थी. तो वहीं सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद इस मामले में कार्रवाई तेज कर दी गई है.

शिक्षा को रद्दी कर दिया भाजपा ने

इस पूरे मामले में यूपी में सियासत तेज हो गई है. इसको लेकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लम्बा-चौड़ा लेख लिखा है और इसे सरकार की साजिश करार दिया है. अखिलेश यादव ने लिखा है, “भाजपा ने शिक्षा को रद्दी कर दिया है.” इसके आगे लिखा है, भाजपा सरकार ने पहले उप्र में, विलय के नाम पर 27000 सरकारी स्कूलों को बंद करने की साज़िश की थी और अब राज्यसभा में शिक्षा-विरोधी भाजपा सरकार ने ये स्वीकार किया है कि पिछले 5 सालों के भाजपा शासनकाल में 18,727 सरकारी स्कूल बंद हुए हैं.

ये हमारे देश के भविष्य के विरुध्द एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है. क्या भाजपाई और उनके संगी-साथी ये चाहते है कि अमीरों के बच्चे तो पढ़ें लेकिन पीडीए समाज के शोषित-वंचित बच्चे नहीं और पीडीए समाज के बच्चे श्रमिक-मज़दूर बनकर ही रह जाएं.

सरकारी स्कूलों को बंद करवा रही है भाजपा

इसी पोस्ट में अखिलेश यादव ने आगे लिखा है, भाजपा की शिक्षा विरोधी सोच ही किताब नहीं बँटवा रही है, सरकारी स्कूलों को बंद करवा रही है. भाजपाई जानते हैं कि शिक्षा से लोगों में जागरूकता और वैज्ञानिक चेतना आती है जो भाजपा की दक़ियानूसी, रूढ़िवादी, संकीर्ण सोच और तंग नज़रिये को उखाड़ फेंकने का काम करेगी। इसीलिए भाजपाई शिक्षा और ज्ञान-विज्ञान के ख़िलाफ़ रहते हैं तथा उनके संगी-साथी अपनी अति-संकीर्ण मानसिकता व एकरंगी नकारात्मक विचारधारा के तहत ही बच्चों को ढालना चाहते हैं.

अखिलेश ने आगे लिखा है, बच्चों से शिक्षा-तालीम का अधिकार छीनना, भाजपाइयों का सामाजिक अपराध है. सरकारी शिक्षा के छिनने से सबसे ज़्यादा नुक़सान पीडीए समाज के लोगों को ही होगा क्योंकि शिक्षा के साथ-साथ पोषण के लिए मिलने वाला मिड-डे मील भी बच्चों को नहीं मिलेगा, जिसका बुरा असर बच्चों के मानसिक-शारीरिक विकास पर होगा.

ऐतिहासिक होगा अलगा चुनाव

अखिलेश यादव ने इसी पोस्ट में आगे लिखा है, “हमारा मानना है कि अगला चुनाव ऐतिहासिक होगा जब शिक्षा का विषय, भाजपा को हराने-हटाने के लिए एक निर्णायक मुद्दा बनेगा क्योंकि ग़रीब से ग़रीब परिवार और ख़ासतौर से हर माँ अपने बच्चे को पढ़ाना चाहती है. इस बार महिलाएं ही भाजपा को हराएंगी. भाजपा खातों में कुछ पैसे डालने का दिखावा करेगी लेकिन गाँव-गली-मोहल्ले तक ये बात फैल चुकी है कि अगर सरकारी स्कूल बंद हो गये तो प्राइवेट स्कूलों की लूट शुरू हो जाएगी और खाते में जितना आएगा नहीं उससे ज़्यादा बच्चों की पढ़ाई में ही चला जाएगा.

भाजपा जितना देती है उससे अधिक वसूल लेती है

अब लोग समझ गये हैं कि भाजपा जितना देती नहीं है उससे कहीं ज़्यादा सामानों के दाम बढ़ाकर और बिजली-पानी के बिल, गैस-डीज़ल-पेट्रोल-सिलेंडर, मोबाइल रिचार्ज, रेल-बस किराये, टोल-पार्किंग को महंगा करके व अन्य टैक्सों को बढ़ाकर वसूल लेती है.” अगर सरकारी शिक्षा ख़त्म हो गयी तो महंगाई और बेकारी-बेरोज़गारी के मारे लोग बच्चों को पढ़ा ही नहीं पायेंगे और जो किसी भी तरह पढ़ाना भी चाहेंगे तो उनकी सारी कमाई, प्राइवेट स्कूलों की भारी भरकम फ़ीस, यूनिफ़ॉर्म-ड्रेस; किताब-कॉपी-स्टेशनरी; बस्ता-बोटल-टिफ़िन; रिक्शा-बस, प्रोजेक्ट-एसाइनमेंट; स्कूल फ़ंक्शन-पिकनिक के खर्चों में ही निकल जाएगी.

शिक्षकों के मान-सम्मान को पहुंची है चोट

अखिलेश ने आगे लिखा है, इसके अतिरिक्त जो स्कूल चल भी रहे हैं वहाँ भी भाजपा शिक्षा का काम चलने ही नहीं देना चाहती है और शिक्षकों को पढ़ाई की जगह अन्य कामों में लगा देती है. इससे सच्चे शिक्षकों का मनोबल गिरता है क्योंकि उन्हें लगता है कि वो पढ़ाने का अपना कर्तव्य पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण शिक्षक-शिक्षार्थी और अभिभावक का संबंध भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है. भाजपा सरकार की शिक्षा-विरोधी नीतियों की वजह से समाज में शिक्षा-शिक्षक के मान-सम्मान को चोट पहुँची है.

इसीलिए शिक्षक समाज में भाजपा के ख़िलाफ़ गहरी नाराज़गी और असंतोष है. अगले चुनाव में भाजपा की हार के मुख्य कारणों में एक कारण शिक्षकों, शिक्षामित्रों, विद्यालयों के कर्मचारियों व शिक्षा से वंचित होते बच्चों के माता-पिता और उनके परिवार के अन्य लोगों का भाजपा के विरुध्द आक्रोश भी होगा.

इसी के साथ ही अखिलेश ने लिखा है कि लगता है ‘पीडीए पाठशाला’ के सांकेतिक आंदोलन को एक वास्तविक आंदोलन के रूप में बदलना होगा, तभी शोषित-वंचित समाज की पीढ़ियाँ आगे पढ़ और बढ़ पाएंगी. इस पोस्ट के अंत में अखिलेश यादव ने लिखा है, आइए हम सब मिलकर शिक्षा को बचाएं, अपने बच्चों का भविष्य बनाएं.

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