Shakuntala University Convocation: शकुन्तला विवि को मिले विशेष दर्जा…13वें दीक्षांत समारोह पर मुख्य अतिथि ने केंद्र सरकार से किया आग्रह

July 31, 2026 by No Comments

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Shakuntala University Convocation: डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (Shakuntala University) का 13वां दीक्षांत समारोह शुक्रवार को विश्वविद्यालय के अटल प्रेक्षागृह में मनाया गया. समारोह में विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। मेधावी विद्यार्थियों को पदक पहनाए जाने के साथ ही सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। पदक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं के चेहरे खुशी से खिल उठे और उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय अपने शिक्षकों, अभिभावकों तथा विश्वविद्यालय को दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत शैक्षिक शोभायात्रा से हुई। इसके बाद राष्ट्रगीत और कुलगीत गायन हुआ। कुलपति आचार्य संजय सिंह ने शुभारंभ की घोषणा की। इसके बाद उन्होंने स्वागत भाषण और विवि का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दीक्षोपदेश दिया। समारोह की विशेषता यह रही कि पूरे कार्यक्रम का सांकेतिक भाषा में भी समानांतर प्रस्तुतीकरण किया गया। साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर्स ने प्रत्येक संबोधन और कार्यक्रम को सांकेतिक भाषा के माध्यम से दिव्यांगजनों तक पहुंचाया। ऐसा हर वर्ष होता रहा है।

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने बटन दबाकर विद्यार्थियों की डिग्रियों को एक साथ डिजिलॉकर पर अपलोड किया। तत्पश्चात कुलसचिव रोहित सिंह ने पदक विजेता विद्यार्थियों को मंच पर आमंत्रित किया। राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप, मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद सी. सदानंदन मास्टर और राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी सुधीर एम बोबडे ने मेधावियों को पदक प्रदान किए। जैसे-जैसे विद्यार्थियों को पदक मिलते गए, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। उत्कृष्ट कार्य करने के लिए शिक्षक पुष्पेंद्र सिंह को सम्मानित किया गया। इसके बाद छोटे बच्चों ने जल व पर्यावण संरक्षण पर मनमोहक प्रस्तुति दी। मंच पर प्रमुख सचिव दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग राजेश कुमार सिंह भी मौजूद रहे। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल की अनुपस्थिति में राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप ने किया।

कुल इतने मिले पदक

दीक्षांत समारोह में कुल 1921 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 956 छात्राएं और 965 छात्र शामिल हैं। कुल उपाधियों में 17 शोध उपाधियां भी प्रदान की गईं। समारोह में कुल 130 मेधावी छात्र-छात्राओं को 156 पदक प्रदान किए गए। इनमें 76 स्वर्ण, 40 रजत और 40 कांस्य पदक शामिल हैं। स्वर्ण पदकों की बात करें तो 32 छात्राओं को 41 स्वर्ण पदक तथा 25 छात्रों को 35 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।

इस प्रकार कुल 57 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक मिले। रजत पदकों में 22 छात्राओं को 24 रजत पदक तथा 14 छात्रों को 16 रजत पदक प्रदान किए गए। कुल 36 विद्यार्थियों को रजत पदक मिले। इसी तरह 24 छात्राओं को 26 कांस्य पदक तथा 13 छात्रों को 14 कांस्य पदक प्रदान किए गए। कुल 37 विद्यार्थियों को कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। कुल मिलाकर 78 छात्राओं को 91 पदक और 52 छात्रों को 65 पदक प्रदान किए गए। इस प्रकार कुल 130 मेधावी छात्र-छात्राओं को 156 पदकों से सम्मानित किया गया।

दीक्षांत समारोह की एक विशेष उपलब्धि दिव्यांग विद्यार्थियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा। कुल 27 दिव्यांग विद्यार्थियों ने 45 पदक हासिल किए। इनमें 13 दिव्यांग छात्राएं और 14 दिव्यांग छात्र शामिल हैं। इन विद्यार्थियों ने 22 स्वर्ण पदक प्राप्त किए, जिनमें 10 छात्राएं और 12 छात्र शामिल रहे। इसके अलावा एक रजत पदक एक छात्र को तथा चार कांस्य पदक प्रदान किए गए, जिनमें तीन छात्राएं और एक छात्र शामिल हैं। दिव्यांग विद्यार्थियों की यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रभावी प्रयासों का प्रमाण बनी। कुलपति आचार्य संजय सिंह ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियां गिनाईं।

बोले मुख्य अतिथि…

मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद सी सदानंदन मास्टर ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज का दिन केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि उपलब्धि, उत्सव और जीवन की नई शुरुआत का दिन है। दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों को केवल डिग्री नहीं देता, बल्कि ज्ञान, उत्तरदायित्व और मानवता की सेवा का संकल्प भी सौंपता है। उन्होंने सभी उपाधि धारकों और उनके अभिभावकों को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

उन्होंने कहा कि डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय देश के उन चुनिंदा संस्थानों में है, जहां दिव्यांग और सामान्य विद्यार्थी एक साथ अध्ययन करते हैं। दृष्टिबाधित, श्रवण बाधित और अन्य दिव्यांग विद्यार्थियों के साथ सामान्य विद्यार्थियों की संयुक्त शिक्षा व्यवस्था समावेशी शिक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह व्यवस्था विद्यार्थियों को केवल किताबों से ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर देती है और उनमें संवेदनशीलता, समानता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करती है।

मुख्य अतिथि ने आगे कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना दिव्यांगजनों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने और उन्हें समान अवसर देने के उद्देश्य से हुई थी। आज यह संस्थान सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की समावेशी सोच को व्यवहार में उतारने का सशक्त उदाहरण बन चुका है। यहां शिक्षा के साथ सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का वातावरण तैयार किया गया है।

उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों की विशेष सराहना करते हुए कहा कि यहां के शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी की आवश्यकता को समझते हुए अतिरिक्त समय और नई शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं। यही समर्पण इस विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी ताकत है और अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए भी प्रेरणा है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय सुगम्यता, पुनर्वास, समावेशी शिक्षा, सहायक तकनीक, कौशल विकास और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। दिव्यांग विद्यार्थियों के सशक्तिकरण के लिए उठाए गए कदम यह साबित करते हैं कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। उन्होंने विश्वास जताया कि विकसित भारत-2047 के निर्माण में ऐसे विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय को विशेष दर्जा (Special Status) देने पर विचार किया जाए। उनका कहना था कि इससे विश्वविद्यालय को शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार, पुनर्वास सेवाओं और दिव्यांगजनों के लिए तकनीकी विकास के क्षेत्र में और अधिक विस्तार करने का अवसर मिलेगा। साथ ही भारत समावेशी शिक्षा और दिव्यांग अध्ययन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में और मजबूत होगा।

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