PM मोदी को अभद्र टिप्पणी करने वाली युवती पर FIR…? सौरभ दास के बयान से खड़ा हुआ बवाल
Delhi News: जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हुआ प्रदर्शन अब खत्म हो चुका है लेकिन इस प्रदर्शन के दौरान जो कुछ भी अभद्र और गंदा हुआ है, उसका बखान वायरल वीडियो कर रहे हैं. जहां कुछ लड़कियां-लड़के वीडियो जारी कर अपने किए पर शर्मिंदा होकर माफी मांग रहे हैं तो वहीं कुछ पर पुलिस लगातार कार्रवाई करने में जुटी है.
इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की नेता रुचिका सिंह पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है.
तो वहीं उनके बचाव में उतरे सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने ऐसा बयान दे दिया है कि राजनीतिक गलियारे से लेकर सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है. फिलहाल पुलिस इस मामले में जांच में जुट गई है. 29 जुलाई को शिकायत के आधार पर गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) के एक्सप्रेसवे थाने में जीरो एफआईआर दर्ज की गई.
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है. इस मामले में चूंकि घटना संसद मार्ग थाना क्षेत्र में हुई थी, इसलिए मामले को दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया है और इसी के बाद से दिल्ली पुलिस वीडियो और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है. तो वहीं पुलिस युवती की तलाश में उसके नोएडा स्थित लोटस जिंग सोसायटी में पहुंची लेकिन उसके घर पर ताला बंद मिला है. खबर है कि रुचिका सिंह अपनी मां के साथ यहां रहा करती थी और वह एक सैलून में काम करती है. फिलहाल पुलिस रुचिका सिंह को तलाश कर रही है.
सौरभ दास ने इस तरह किया बचाव
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सीजेपी प्रवक्ता व वकील सौरभ दास ने एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा है कि “रुचिका सिंह के खिलाफ आपराधिक कानूनों का इस्तेमाल पूरी तरह से अस्वीकार्य वाला है. अभद्र भाषा अपने आप में किसी आपराधिक मुकदमे का आधार नहीं बनती.” वह यहीं नहीं रुके आगे कहा कि लोकसभा के करीब 50 प्रतिशत सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें लगभग 100 भाजपा के हैं. पुलिस को अपनी ऊर्जा उनके मामलों पर लगानी चाहिए, न कि किसी 25 साल की एक युवती के पीछे. युवाओं का उत्पीड़न तुरंत बंद होना चाहिए.
सौरभ दास के इस बयान के बाद लोग सवाल खड़े कर रहे हैं कि क्या फिर संवैधानिक पद पर बैठे प्रधानमंत्री तक को अपशब्द बोलने की अनुमति है. इससे समाज पर क्या असर होगा? इस तरह से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक पदों की गरिमा के बीच संतुलन को लेकर एक नई बहस सोशल मीडिया पर छेड़ दी गई है. जहां एक ओर एक पक्ष इस मामले में कार्रवाई की मांग कर रहा है, तो वहीं बचाव पक्ष इसे राजनीतिक विरोध के रूप में देखे जाने की बात कह रहा है.
जानें क्या है पूरा मामला?
मालूम हो कि 23 जुलाई 2026 को नीट पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शन हुए. इसी दौरान रुचिका सिंह नाम की एक युवती का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करती हुई दिख रही हैं.
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