UP News: अब इन ‘अनाथ’ बच्चों का कौन नाथ…? 15 महीने से नए गठन की बाट जोह रहा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग

March 14, 2026 by No Comments

Share News

UP News: उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के कार्यकाल को समाप्त हुए 15 महीने हो गए हैं लेकिन अभी तक नए आयोग का गठन नहीं हो सका है. इस वजह से शिक्षा का अधिकारी अधिनियम (RTE), पॉक्सो एक्ट, बाल श्रम, बाल विवाह आदि मामलों में पीड़ित बच्चों का एकमात्र सहारा भी छिन गया है व करीब 5 से 10 हजार शिकायतों का निस्तारण करने वाला कोई नहीं है.

यानी एक तरह से कहें तो बाल अधिकार संरक्षण आयोग ऐसे पीड़ित बच्चों का सहारा है और एक पिता व माता की भांति इनकी मदद करता है लेकिन नए आयोग का गठन अभी तक न हो पाने के कारण इन पीड़ित बच्चों का कोई नाथ प्रदेश में नहीं है और बच्चे व उनके परिजन न्याय के लिए दर-दर भटकने के लिए मजबूर हैं.

बता दें कि आयोग प्रदेश में शिक्षा का अधिकारी अधिनियम (RTE), पॉक्सो एक्ट, बाल श्रम, बाल विवाह सहित कई अन्य और कानून का पालन कराने का काम करता है और किसी भी तरह से पीड़ित बच्चों के लिए हमेशा खड़ा रहता है. आयोग का कार्यकाल 16 नवम्बर 2024 में खत्म हो गया था. तीन साल के लिए आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का चयन किया जाता है और नियम के मुताबिक, कार्यकाल खत्म होने के तुरंत बाद ही आयोग का गठन हो जाना चाहिए था ताकि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा हो सके लेकिन विडम्बना है कि शासन स्तर से 15 महीने बाद भी आयोग का गठन नहीं हो सका है.

दो बार का राइट टू एजूकेशन का सत्र भी निकल चुका है. दरअसल कई बार होता है कि आरटीई के तरह प्राइवेट स्कूल गरीब व आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों का दाखिला नहीं लेते जबकि नियम है कि ऐसे बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी. ऐसे में जब एडमिशन नहीं हो पाते तो इस तरह की शिकायतें आयोग में आती हैं और फिर आयोग बच्चों के एडमिशन में मदद करता है लेकिन अफसोस कि इस तरह के पीड़ित बच्चे समिति का समय पर गठन न हो पाने के कारण 15 महीने से “अनाथ” हो गए हैं.

इनका भी खत्म हुआ कार्यकाल

बता दें कि बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड जो कि जिले स्तर पर बच्चों के संरक्षण की समितियां है इनका भी कार्यकाल जून 2024 में खत्म हो चुका है. आयोग इनकी निगरानी करने का काम करता है. चूंकि आयोग का गठन नहीं हो सका है इसलिए इन समितियों के गठन में भी समस्या आ रही है. ये समितियां भी पॉक्सो एक्ट आदि से पीड़ित बच्चों का संरक्षण करती है. तो वहीं बाल कल्याण समिति प्रदेश के हर जिले में स्थित बालिका बाल गृह व बालक बाल गृह में आए बच्चों की काउंसिलिंग कर उनको समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का काम करती है.

ये भी पढ़ें-सरकारी शिक्षक का चौंकाने वाला कारनामा… कक्षा 6 के बच्चों से चेक करवाई हाईस्कूल की कॉपियां-Video