Mohini Ekadashi: माता सीता की खोज के लिए प्रभु श्रीराम ने भी रखा था मोहिनी एकादशी का व्रत, इस तरह करें पूजा, पढ़ें कथा
Mohini Ekadashi: वैशाख शुक्ल एकादशी को मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi) कहते हैं। यह व्रत भी कृष्ण पक्ष की एकादशी की तरह ही किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से खराब कर्मों के पाप से छुटकारा मिलता है व मोह का बंधन टूट जाता है। आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि माता सीता की खोज के दौरान भगवान श्री राम ने भी यह व्रत किया था। तो वहीं मुनि कौण्डिन्य के कहने पर धृष्टबुद्धि और श्रीकृष्ण के कहने पर युधिष्ठिर ने इस व्रत को किया था।
इस दिन भगवान श्रीराम की पूजा करने का विधान शास्त्रों में दिया गया है। इस दिन भगवान की प्रतिमा को स्नान कराने के बाद उत्तम वस्त्र पहना कर उच्चासन पर बैठाना चाहिए। इसके बाद विधि-विधान से परम्परागत पूजा-अर्चना करनी चाहिए। साथ ही मीठे फलों का भोग लगाना चाहिए। ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देना चाहिए। रात्रि को कीर्तन करते हुए भगवान की प्रतिमा व मूर्ति के पास ही सोएं। ऐसा करने से प्रभु की सदैव कृपा बनी रहती है।
मोहिनी एकादशी का पूजन मंत्र
ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।
ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।
ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान। यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्टं च लभ्यते।
प्रचलित कथा
एक राजा का पुत्र बहुत ही दुराचारी था। इस पर राजा ने दुखी होकर उसे घर से निकाल दिया। इस पर वह वन में रहते हुए लूटमार करने लगा और जानवरों को मार कर खाने लगा। एक दिन वह ऋषि के आश्रम में पहुंचा। आश्रम के पवित्र वातावरण से उसका ह्रदय भी पवित्र हो गया और वह पाप कर्मों से विरत हो गया। इसी के साथ ऋषि ने उसे अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए मोहिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। इस पर राजा के बेटे ने इस व्रत को विधि पूर्वक किया। व्रत करने से उसकी बुद्धि निर्मल हो गई और उसके सारे पाप कर्म नष्ट हो गए।
DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति में प्रमाणिक ज्योतिषियों से ही परामर्श लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)