Corruption Case: गलत तरीके से IET के निदेशक बने विनीत कंसल हटाए गए, क्या लगे हैं आरोप, प्रो. विनय पाठक ने किया था बड़ा हेरफेर
लखनऊ। एकेटीयू के पूर्व कुलपति व छत्रपति शाहूजी महाराज के वर्तमान कुलपति प्रो. विनय पाठक के भ्रष्टाचार और गलत नियुक्ति के एक खेल पर सोमवार को विराम लग गया। दरअसल प्रो. पाठक की मदद से IET (Institute of Engineering and Technology) लखनऊ के निदेशक बनाए गए प्रो. विनीत कंसल को मंगलवार दोपहर कार्यमुक्त कर दिया गया।
प्रो. कंसल पर आरोप है कि इंजीनियरिंग में पीएचडी न होते हुए भी उनको एक इंजीनियरिंग कॉलेज का निदेशक बना दिया गया। इसी के साथ उनके पास वो अनुभव भी नहीं थी, जो निदेशक के पद के लिए आवश्यक होता है। आरोप है कि प्रो. पाठक ने रातो-रात कागजों में हेराफेरी कर अपने हित के लिए कंसल को निदेशक बनाया।
बता दें कि गलत तरीके से निदेशक के पद पर बिठाए गए प्रो. कंसल के खिलाफ कॉलेज के शिक्षकों में रोष था, जिसकी जानकारी एकेटीयू कुलपति को होने के बाद सारे तथ्यों की जांच पड़ताल कराई गई, जो कि सही पाया गया। इसी के बाद कुलपति प्रदीप कुमार मिश्र ने सोमवार की दोपहर को निदेशक के पद से कार्यमुक्त करते हुए उनको डिपार्टमेंट ऑफ एमसीए, आईटी से सम्बद्ध कर दिया गया है। तो वहीं कुलपति के पद के लिए प्रो. वंदना सहगल, प्राचार्य/डीन, फैकल्टी ऑफ आर्किटेक्चर एवं प्लानिंग लखनऊ को आईईटी निदेशक के पद पर तत्काल प्रभाव के नियुक्त कर दिया गया है।
जानें कंसल पर क्या लगे हैं आरोप
प्रो. कंसल के मामले में आईटी के शिक्षकों और सीनियर प्रोफेसर्स ने पूर्व में आरोप लगाया था कि बेसिक क्वालीफिकेशन में कंसल को एमसीए या फिर कंप्यूटर साइंस विषय में एमटेक पीएचडी होना चाहिए, परंतु यह प्रबंधन विभाग आईआईटी दिल्ली में एमटेक व पीएचडी में इनरोल थे ,जोकि एआईसीटीई,गाइडलाइन के अनुसार किसी भी एमसीए विभाग में प्रोफेसर के लिए भी अर्ह योग्यता नहीं है। जबकि उनको सीधे प्रोफेसर बना दिया गया है। इसी के साथ ये भी आरोप लगाए गए हैं कि कंसल को प्रो. पाठक ने कागजों में तमाम हेराफेरी कर 10 साल की सीनियरटी भी दे दी।
केवल यही नहीं, कंसल को नियुक्त करने के लिए तमाम योग्यतम प्रोफेसरों को भी अनदेखा किया गया और उनको सीधे आईईटी का निदेशक बना दिया गया। जबकि वह प्रबंधन विभाग के थे और यह एक इंजीनियरिंग कॉलेज है। इस लिहाज से एक इंजीनियरिंग में पीएचडी वाले को ही निदेशक होना चाहिए। इस गलत नियुक्ति को लेकर कॉलेज के कई वरिष्ठ प्राध्यापको में आक्रोश व्याप्त हो गया है। बताया जा रहा है कि अभी तक सीनियर प्रोफेसर प्रो. पाठक के रसूख के चलते आवाज नहीं उठा पाते थे।
बता दें कि करीब दो महीने से प्रो. पाठक फरार चल रहे हैं। उन पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगे हैं। गम्भीर आरोप लगे होने के बावजूद वह अभी तक कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर बने हुए हैं। फिलहाल उनके खिलाफ एसटीएफ जांच कर रही थी, लेकिन अब उनकी जांच सीबीआई के हाथ में चली गई है। खबरों के मुताबिक जल्द ही उनके मामले में सीबीआई जांच शुरू करेगी। इसी के साथ ईडी भी मनी लॉन्ड्रिग का मामला दर्ज करेगी।