Akshaya Tritiya 2023: अक्षय तृतीया पर भगवान बद्रीनारायण को अर्पित करें उनके पसंद की ये चीज, इस विधि से करें ब्रह्मा सहित सभी देवताओं को प्रसन्न, जानें उपवास के लाभ, पढ़ें कथा

April 14, 2023 by No Comments

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Akshaya Tritiya 2023: वैशाख शुक्ल तृतीया को सनातन धर्म का सबसे पवित्र त्योहार अक्षय तृतीया मनाया जाता है। इसे आखातीज भी कहते हैं। इस बार यह त्योहार 23 अप्रैल 2023 को मनाया जाएगा। इसी दिन ब्राह्मणों के भगवान परशुराम जयंती भी मनाई जाती है. इसलिए इसी दिन ब्राह्मणों को दान करना शुभफलदाई माना गया है. वैसे भी कहते हैं कि इस दिन का किया गया दान-पुण्य सब अक्षय हो जाता है। अर्थात दान-पुण्य का फल कभी भी नहीं मिटता। इस दिन पूरा दिन शुभ रहता है। वहीं इस दिन किया गया व्रत भी व्रती को लाभ देता है.

बद्रीनारायण को चढ़ाएं तुलसीदल
इसी दिन चारो धामों में सबसे प्रमुख श्री बद्रीनारायण जी के पट खुलने की भी परम्परा है। इस दिन भक्तों को चाहिए की श्री बद्रीनारायण जी के चित्र को सिंहासन पर रख कर उन्हें मिश्री तथा भीगी हुई चने की दाल का भोग लगाना चाहिए। साथ ही भगवान को तुलसीदल भी चढ़ाना चाहिए। इसी के साथ पूजा व आरती करनी चाहिए।

जप,उपवास व दान का ये होता है महत्व
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि, इस दिन किया गया उपवास, जप, ध्यान, स्वाध्याय भी अक्षय फलदायी होता है। एक बार हल्का भोजन करके भी उपवास कर सकते है। ‘भविष्य पुराण’ में आता है कि इस दिन दिया गया दान अक्षय हो जाता है। इस दिन पानी के घड़े, पंखे, (खांड के लड्डू), पादत्राण (जूते-चप्पल), छाता, जौ, गेहूँ, चावल, गौ, वस्त्र आदि का दान पुण्यदायी है। परंतु दान सुपात्र को ही देना चाहिए।

इस कार्य से करें ब्रह्मा सहित सभी देवताओं को प्रसन्न
भविष्यपुराण, ब्राह्मपर्व, अध्याय 21 में दिया गया है कि वैशाख मास की तृतीया को चन्दनमिश्रित जल तथा मोदक के दान से ब्रह्मा तथा सभी देवता प्रसन्न होते हैं। देवताओं ने वैशाख मास की तृतीया को अक्षय तृतीया कहा है। इस दिन अन्न-वस्त्र-भोजन-सुवर्ण और जल आदि का दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।इसी तृतीया के दिन जो कुछ भी दान किया जाता है वह अक्षय हो जाता है और दान देने वाला सूर्यलोक को प्राप्त करता है। इस तिथि को जो उपवास करता है वह ऋद्धि-वृद्धि और श्री से सम्पन्न हो जाता है।

इसी दिन से माना गया है सतयुग व त्रेतायुग का आरम्भ
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि, इस दिन से सतयुग और त्रेतायुग का आरम्भ माना जाता है। इस दिन किया हुआ जप, तप, ज्ञान, स्नान, दान, होम आदि अक्षय रहते हैं। इसी कारण इस तिथि को अक्षय तृतीया कहते हैं। यदि यह व्रत सोमवार तथा रोहिणी नक्षत्र में आए तो महाफलदायक माना जाता है। यदि तृतीया मध्याह्न से पूर्व शुरू होकर प्रदोषकाल तक रहती है तो श्रेष्ठ मानी जाती है। वर्तमान समय में इस दिन सोने के आभूषण खरीदने का प्रचलन बढ़ गया है। मान्यता है कि अगर सोना खरीदो तो साल भर घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती और पैसे का आवागमन बना रहता है।

पढ़ें कथा

यहां करें बद्रीनाथ धाम के दर्शन

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)