बेसिक शिक्षा टीचर ने की आत्महत्या… ये वजह आई सामने; 15 सितम्बर को पूरे देश के शिक्षक…
Hamirpur: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है. यहां राठ कोतवाली क्षेत्र के अतरौलिया मोहल्ला राठ के रहने वाले बेसिक शिक्षा के टीचर ने फांसी लगाकर जान दे दी है. इस घटना के बाद से ही परिवार में मातम पसरा हुआ है. तो वहीं शिक्षकों में रोष व्याप्त हो गया है. खबर सामने आ रही है कि शिक्षक ने TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) परीक्षा के तनाव और नौकरी जाने के डर से यह कदम उठाया. वह राठ ब्लॉक के गोहानी गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात थे. फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.
सोशल मीडिया पर वायरल जानकारी के मुताबिक राठ के सैना रोड दीवानपुर निवासी गनेशीलाल सहायक अध्यापक थे और महोबा के उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात थे। बेटे अनुराग ने बताया कि पिता कुछ दिन पहले पिंडदान के लिए गया जी गए थे। शुक्रवार को ही वह घर वापस लौटे थे और रात में सो गए थे लेकिन जब शनिवार सुबह हम उठे तो देखा कि वह कहीं नहीं मिले.
इसके बाद उनकी तलाश शुरू की तो कुछ पता नहीं चला. बेटे ने बताया कि इसके बाद मैं अपने दूसरे घर अतरौलिया पहुंचा तो अंदर उसने पिता का शव बिजली के तार के जरिए लटकते हुए देखा। इसके बाद बेटे ने दावा किया कि कोर्ट से टीईटी पास करने की अनिवार्यता का आदेश जब से आया तभी से वह काफी परेशान चल रहे थे। उन्हें इस उम्र में नौकरी जाने का डर सताने लगा था और वह इसके तनाव को झेल नहीं सके और आत्महत्या कर ली. हम अनाथ हो गए. बता दें कि इससे पहले महोबा में एक अन्य शिक्षक मनोज साहू ने भी आत्महत्या कर ली थी। उनकी आत्महत्या के पीछे भी टीईटी आदेश ही बताया जा रहा था.
टीईटी पास करना हो गया है अनिवार्य
गौरतलब है कि हाल में सुप्रीम कोर्ट ने बेसिक शिक्षा में सालों से कार्य कर रहे शिक्षकों को भी पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करना अनिवार्य कर दिया है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, जिन शिक्षकों की नौकरी के पांच साल या इससे अधिक शेष रह गए हैं तो ऐसे सभी शिक्षकों को टीईटी पास करना होगा। तभी उनकी नौकरी जारी रहेगी और ऐसा नहीं होने पर उन्हें नौकरी से इस्तीफा देना पड़ेगा या अनिवार्य सेवानिवृत्ति (कंपलसरी रिटायरमेंट) लेनी होगी। कहा जा रहा है कि इसी के बाद से प्रदेश भर के लाखों शिक्षकों को इस उम्र में नौकरी जाने का खतरा सता रहा है और वे जिंदगी से हार मान रहे हैं.
पूरे देश के मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा ज्ञापन
प्रदेश भर के शिक्षकों में इसको लेकर रोष है. शिक्षकों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर आंखों पर लेकिन इस नौकरी में कोई 20 साल गुजार चुका है तो कोई रिटायरमेंट के करीब है. ऐसे में इस परीक्षा को पास करने की अनिवार्यता ने शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के विरोध में कल यानी 15 सितम्बर को एक साथ एक समय पर पूरे देश के सभी राज्यों के सभी जिलों के जिलाधिकारी के माध्यम से अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारी मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौपेंगे और इस तरह से अपना विरोध जताएंगे.
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ कानपुर जिलाध्यक्ष चंद्रदीप सिंह यादव का कहना है कि जिस समय बेसिक शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उस समय वे तब के नियमों के अनुसार योग्यता रखते थे. इसीलिए तो उनकी नियुक्ति हुई और अब टीईटी की परीक्षा पास करने की अनिवार्यता को थोपना न्यायसंगत नहीं है. इस मामले में माननीय प्रधानमंत्री जी को हस्तक्षेप करना होता ताकि आत्महत्या को गले लगा रहे व तनाव में जीवन बिता रहे शिक्षकों की जान बचाई जा सके.
सरकार हर साल बदल रही है नियम
सोशल मीडिया पर गाज़ीपुर के केंद्रीय विद्यालय के शिक्षक नीरज राय का एक बयान वायरल हो रहा है. इसमें उन्होंने कहा है कि सरकार हर साल नियम बदल रही है. इससे लगातार बेरोजगार युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. सरकार कभी उम्र की सीमा बदल रही है तो कभी TET की पात्रता घटा-बढ़ा रही है. वह कहते हैं कि पहले जो शिक्षक नियुक्त हुए थे, उनकी भर्ती उस समय के नियम और पात्रता मानकों के हिसाब से हुई थी. अब सेवा के अंतिम सालों में उनसे TET पास करने के लिए कहना बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है. वह कहते हैं कि जिस शिक्षक की सेवा केवल 5 साल बची है. उससे यह कह देना कि अब आप TET पास करें नहीं तो नौकरी चली जाएगी. यह किसी तरह भी ठीक नहीं.
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