Radha Ashtami: राधा अष्टमी पर खरीद कर घर लाएं तीन चीजें…परिवार में बढ़ेगा प्यार-स्नेह
Radha Ashtami: हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी (Radha Ashtami) के रूप में मनाई जाती है. इन दिन राधा रानी जी का जन्म हुआ था. राधा रानी को भगवान श्रीकृष्ण की आराध्या संगिनी के रूप में माना जाता है.
धर्म सनातन में राधा अष्टमी का महत्व ठीक उसी तरह है जिस तरह श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का है. राधा अष्टमी (Radha Ashtami) को राधा जयंती (Radha Jayanti) भी कहा जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन राधा रानी और श्रीकृष्ण (Shri Krishna) की श्रद्धापूर्वक विधिवत पूजा करनी चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से साधक को उत्तम फल की प्राप्ति होती है. तो वहीं राधा जी का आशीर्वाद मिलता है जिससे जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
पौराणिक कथाओं की मानें तो इस दिन राधा जी की विशेष पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख, सौभाग्य तो मिलता ही है साथ ही वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता रहता है. तो वहीं माना जाता है कि अगर राधा अष्टमी पर श्रीकृष्ण से जुड़ी कुछ पवित्र वस्तुएं घर लाएं तो इससे घर में शुभता आती है.
कदंब पौधा
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि कदंब (Kadamba) का पेड़ भगवान श्रीकृष्ण को अति प्रिय रहा है. इसीलिए तो वह यमुना नदी के किनारे कदंब के पेड़ पर बैठकर बांसुरी बजाते थे. जिसकी मधुर धुन सुनकर गायें और गोपियां उनके पास आ जाती थीं. इसलिए माना गया है कि अगर राधा अष्टमी के दिन इस पौधे को घर लाकर आंगन, बालकनी या घर के किसी खुले स्थान पर लगाना चाहिए। माना जाता है कि इस पौधे से घर में सुख-समृद्धि आती है और वातावरण शुद्ध बना रहता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा रहती है.
बांसुरी
भगवान श्रीकृष्ण की अधरों पर हमेशा बांसुरी रहती थी और इसकी धुन राधा रानी को अत्यंत प्रिय थी। कई कथाओं में ये जिक्र मिलता है कि इस बांसुरी को राधा रानी अपनी सौतन तक कहती थीं. मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण गोकुल छोड़कर मथुरा जाने लगे तो राधारानी को अपना बांसुरी दे गए थे. इसी कारण माना गया है कि राधा अष्टमी पर घर में बांसुरी लाने की परंपरा रही है। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और सामंजस्य का वातावरण बना रहता है। बांसुरी को अपने घर के किसी पवित्र स्थान पर रखें और नियमित रूप से पूजा करें.
मोरपंख
राधा अष्टमी पर मोरपंख घर ला सकते हैं. ये तो सभी जानते हैं कि भगवान कृष्ण के श्रृंगार में मोरपंख का विशेष स्थान माना गया है। मोरपंख सदैव उनके मुकुट पर सजा रहता है. यह आध्यात्मिक ऊर्जा का वाहक का संकेत देता है. राधा जी को भी मोरपंख अत्यंत प्रिय है। इसलिए अगर इसे राधा अष्टमी पर घर लाते हैं तो परिवार पर राधा-कृष्ण की विशेष कृपा बनी रहती है।
DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)
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