दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में छाए दीपांशु शौकीन…जानें क्यों हो रही है चर्चा? NSUI हारी, ABVP जीती-Video
DUSU Election Results 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2026 में ABVP ने NSUI को करारी शिकस्त देकर जीत हासिल कर ली है. बता दें कि दोनों के बीच अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों के लिए कांटे की टक्कर देखने को मिली थी लेकिन एबीवीपी ने 4 में से 3 अहम सीटों पर कब्जा जमाकर जीत हासिल कर ली है.
अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास ने जीत हासिल की है तो वहीं सचिव पद पर एबीवीपी की रिया छाबरी ने जीती हैं व संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के लक्ष्यराज चौधरी जीते हैं. तो वहीं इस चुनाव में दीपांशु शौकीन की चर्चा जोरों पर हो रही है.
दरअसल ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद-भाजपा) ने NSUI (नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया-कांग्रेस) जैसी पारंपरिक राजनीतिक दलों के चक्रव्यूह को भेदते हुए उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने रिकॉर्ड तोड़ जीत हासिल की. इस चुनाव में भारी-भरकम वोटों के मार्जिन के साथ दीपांशु ने जो ऐतिहासिक जीत हासिल की है, उसीने उनको चर्चा में ला दिया है.
साथ ही उन्होंने ये भी साबित कर दिया है कि आज का युवा लीक से हटकर काम करने वाले चेहरों पर भरोसा करना जानता है. इसी के साथ ही इस चुनाव ने ये साबित कर दिया कि नॉर्थ कैंपस की सियासत हमेशा अप्रत्याशित और बेहद रोमांचकारी होता है. तो वहीं एनएसयूआई के लिए मुकाबला काफी निराशाजनक रहा क्योंकि वह प्रमुख पदों पर पीछे रह गई. जहां एक और एबीवीपी की जीत के बाद भाजपा खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई है तो वहीं एनएसयूआई की हार ने कांग्रेस को एक बार फिर से राजनीतिक रणनीति के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया है.
क्या करते हैं माता-पिता?
दीपांशु शौकीन के पिता बस कंडक्टर हैं तो वहीं मां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं. दीपांशु ने भगत सिंह कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है. तो वहीं अब डिपार्टमेंट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज के छात्र हैं. चुनाव प्रचार के दौरान दीपांशु और ABVP के उम्मीदवार यश डबास के बीच संभावित साथ गठजोड़ की भी चर्चा रही. क्योंकि दोनों ही जाट समुदाय से आते हैं. हालांकि दोनों ने ही इन खबरों का खंडन कर दिया था.
NSUI से मांगा था टिकट
दरअसल दीपांशु की जीत इसलिए भी चर्चा का विषय है क्योंकि उन्होंने पहले NSUI से टिकट मांगा था और उनका नामांकन भी हो गया था लेकिन संगठन की ओर से नामांकन वापस लेने को कहा गया. इस पर दीपांशु ने ऐसा करने से इनकार करते हुए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ही चुनावी मैदान में कूद गए और खुलकर बगावत की.
सत्य निकेतन हादसे के बाद बदल गया पूरा खेल
दिल्ली सत्य निकेतन हादसा होने के बाद दीपांशु शौकीन ने प्रण किया था कि जब तक छात्रो को न्याय नहीं मिलेगा वो जूते नहीं पहनेंगे. इसके बाद छात्र राजनीति में उनकी सक्रियता तेजी से बढ़ी थी और वह चर्चा में आ गए थे. हालांकि दीपांशु को आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई ASAP में शामिल होने का प्रस्ताव मिलने की भी चर्चा रही लेकिन इससे दीपांशु ने इंकार कर दिया.
परिवार नहीं चाहता था कि शौकीन राजनीति करें
दीपांशु शौकीन पढ़ाई में तेज माने जाते हैं. इसलिए पिता चाहते थे कि वह UPSC की तैयारी करें और प्रशासनिक अधिकारी बनें लेकिन शौकीन ने राजनीति को चुना और छात्र राजनीति की तरफ अपना कदम बढ़ा दिया.
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