सनातन धर्म में साल के 365 दिन में चार नवरात्र पड़ते हैं, जिनमें से लोगों को दो ही नवरात्र में मां भगवती की पूजा करने का विधान बताया गया है और दो नवरात्र की पूजा साधू व संत विशेष साधना के तौर पर करते हैं। गृहस्थ लोगों के शारदीय व चैत्र नवरात्र ही करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है, लेकिन गुप्त नवरात्र के दौरान व्रत-पूजा न करके अगर कष्टों को दूर करने के लिए उपाय किए जाएं, तो काफी फलदायक रहते हैं।
इस सम्बंध में आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्र 30 जून 2022 गुरुवार से शुरू हो रही हैं, जो 08 जुलाई, शुक्रवार तक रहेंगी। नवरात्र के इन 9 दिनों में देवी के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों में देवी को विभिन्न प्रकार के भोग भी लगाए जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस उपाय से साधक (उपाय करने वाला) की सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। चूंकि इस नवरात्र में व्रत करना नहीं है, इसलिए कन्या भोज भी नहीं कराया जाएगा, लेकिन मां भगवती को प्रतिदिन के हिसाब से भोग लगाकर मनोकामना की पूर्ति अवश्य की जा सकती है।
प्रतिपदा तिथि के दिन माता को घी का भोग लगाएं। इससे रोगी को कष्टों से मुक्ति मिलती हैं और काया (शरीर) निरोगी होता है। द्वितीया को माता को शक्कर का भोग लगाएं। इससे उम्र लंबी होती है। तृतीया को माता को दूध का भोग लगाएं। इससे सभी प्रकार के दुःखों से मुक्ति मिलती है। चतुर्थी के दिन माता को मालपुआ का भोग लगाएं। इससे समस्याओं का अंत होता है। पंचमी तिथि को माता को केले का भोग लगाएं। इससे परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। षष्ठी के दिन माता को शहद का भोग लगाएं। इससे धन लाभ होने के योग बनते हैं। सप्तमी तिथि पर माता को गुड़ का भोग लगाएं। इससे हर मनोकामना पूरी हो सकती है। अष्टमी तिथि पर माता को नारियल का भोग लगाएं। इससे घर में सुख-समुद्वि बनी रहती है। नवमी तिथि को माता को विभिन्न प्रकार के अनाज का भोग लगाएं। इससे वैभव व यश मिलता है।
DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)