Sleeping Rules: नहीं सोना चाहिए नग्न होकर या बिल्कुल अंधेरे कमरे में, जानें इस बारे में क्या कहते हैं मनुस्मृति से लेकर चाणक्यनीति, देवीभागवत, पद्मपुराण, महाभारत और ब्रह्मवैवर्तपुराण, देखें शयन के 18 नियम

August 21, 2022 by No Comments

Share News

अक्सर आपने घर के बड़े-बुजुर्गों द्वारा ये कहते सुना होगा कि इस दिशा की ओर सिर करके मत सो, ये सही नहीं है। या फिर ये सुना होगा कि हाथ-पैर धो कर सो। वर्ना खराब सपने आएंगे…आदि..आदि। तो आज हम आपको इस लेख के माध्यम से बता रहे हैं कि सनातन धर्म के वेद-पुराण शयन के बारे में क्या नियम बताते हैं।

आचार्य विनोद कुमार मिश्र, निदेशक, भारतीय ज्योतिष अनुसन्धान संस्थान, लखनऊ, इस लेख में शयन के उन नियमों का वर्णन कर रहे हैं जो कि मनुस्मृति, चाणक्यनीति, देवीभागवत, पद्मपुराण, अत्रिस्मृति, महाभारत, गौतम धर्म सूत्र, आचारमयूख और ब्रह्मवैवर्तपुराण में बताए गए हैं। तो आइए जानें कि हमें कैसे सोना चाहिए और आज से ही हम इसमें सुधार करके अपने जीवन में बदलाव देखें।

आचार्य का दावा है कि इन 18 नियमों का अनुकरण करने वाला यशस्वी, निरोग और दीर्घायु होता है, अवश्य अपनाएं इसे

ललाट पर तिलक लगाकर सोना अशुभ माना गया है। इसलिये सोते समय तिलक हटा दें।
सूने तथा निर्जन घर में अकेला नहीं सोना चाहिए। देव मन्दिर और श्मशान में भी नहीं सोना चाहिए। (मनुस्मृति)
बिल्कुल अँधेरे कमरे में नहीं सोना चाहिए। ऐसा पद्मपुराण कहता है।
किसी सोए हुए मनुष्य को अचानक नहीं जगाना चाहिए। ऐसा विष्णुस्मृति में बताया गया है।
विद्यार्थी, नौकर औऱ द्वारपाल आगर अधिक समय से सो रहे हैं तो इन्हें जगा देना चाहिए। (चाणक्यनीति)
स्वस्थ मनुष्य को आयुरक्षा हेतु ब्रह्ममुहुर्त में उठना चाहिए। (देवीभागवत)
भीगे पैर नहीं सोना चाहिए। सूखे पैर सोने से लक्ष्मी (धन) की प्राप्ति होती है। (अत्रिस्मृति)


टूटी खाट पर तथा जूठे मुँह सोना वर्जित है। (महाभारत)
“नग्न होकर/निर्वस्त्र” नहीं सोना चाहिए। (गौतम धर्म सूत्र)
पूर्व की ओर सिर करके सोने से विद्या, पश्चिम की ओर सिर करके सोने से प्रबल चिन्ता, उत्तर की ओर सिर करके सोने से हानि व मृत्यु तथा दक्षिण की ओर सिर करके सोने से धन व आयु की प्राप्ति होती है। (आचारमय़ूख)
दिन में कभी नहीं सोना चाहिए। परन्तु ज्येष्ठ मास में दोपहर के समय 1 मुहूर्त (48 मिनट) के लिए सोया जा सकता है। (दिन में सोने से रोग घेरते हैं तथा आयु का क्षरण होता है)
दिन में तथा सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सोने वाला रोगी और दरिद्र हो जाता है। (ब्रह्मवैवर्तपुराण)
सूर्यास्त के एक प्रहर (लगभग 3 घण्टे) के बाद ही शयन करना चाहिए।


बायीं करवट सोना स्वास्थ्य के लिये हितकर है।
दक्षिण दिशा में पाँव करके कभी नहीं सोना चाहिए। यम और दुष्ट देवों का निवास रहता है। कान में हवा भरती है। मस्तिष्क में रक्त का संचार कम को जाता है, स्मृति- भ्रंश, मौत व असंख्य बीमारियाँ होती है।
हृदय पर हाथ रखकर, छत के पाट या बीम के नीचे और पाँव पर पाँव चढ़ाकर निद्रा न लें।
शय्या पर बैठकर खाना-पीना अशुभ है।
सोते सोते पढ़ना नहीं चाहिए। (ऐसा करने से नेत्र ज्योति घटती है )

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)