Kanya Pujan: मां दुर्गा के नौ रूपों की बरसेगी कृपा…कन्याओं को दें ये गिफ्ट
Kanya Pujan in Navratri Festival: नवरात्र की अष्टमी और नवमी को कन्या भोज कराने का विधान धर्म शास्त्रों में दिया गया है। मान्यता है कि अगर नवरात्र की पूजा बिना कन्या भोज के कर ली जाए तो मां प्रसन्न नहीं होती हैं, फिर चाहे आपने मां को सोने का मुकुट ही क्यों न पहनाया हो। अर्थात नवरात्र की पूजा तभी सम्पन्न होती है, जब कन्या भोज कराया जाए। वैसे तो नवरात्र के प्रथम दिन से ही कन्या को भोज कराने का विधान दिया गया है, लेकिन अगर ऐसा नहीं कर सकते हो अष्टमी या नवमी को अपनी क्षमता अनुसार 9, 11, 21 कन्याओं को भोजन कराकर उन्हें दक्षिणा देनी चाहिए।
इस दौरान ये जरूर ध्यान रखें कि कन्याओं की उम्र एक से नौ साल के बीच में ही हो। आचार्य सुशील शास्त्री बताते हैं कि नवरात्र पर माता शक्ति के नौ रूपों की पूजा करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है। इसी के साथ नवरात्र के प्रत्येक दिन माता के रूप की पूजा के साथ ही कन्याओं के भोजन कराने का भी विधान बताया गया है, लेकिन नवरात्र के प्रतिदिन भक्त कन्या पूजन नहीं कर पाते हैं।
ऐसे में नवरात्र की अष्टमी अथवा नवमी को भी विधि-विधान से मां के सभी रूपों का ध्यान कर कन्या पूजन व भोजन कराने से पूरी नवरात्र का फल प्राप्त हो जाता है। तो आइए इस लेख में जानते हैं कि मां भगवती के किस रूप को प्रसन्न करने के लिए कन्याओं को क्या चीज उपहार में देनी चाहिए। इस बात का खास ख्याल रखें कि अष्टमी, नवमी को पांच, सात, नौ, 11 आदि संख्या में कन्याओं को भोजन कराना चाहिए। इसी के साथ ही एक बालक (लंगूरा) को भी भोजन कराएं। सभी कन्याओं को अपनी इच्छानुसार दक्षिणा जरूर दें।

प्रथम शैलपुत्री
कन्या को हलवा-पूड़ी आदि का भोज कराने के बाद कंघा, हेयर ब्रश, हेयर क्रीम या बैंड उपहार मे दें।

द्वितीय माता ब्रह्मचारिणी
कन्याओं को भोज कराने के बाद खुशबूदार तेल की शीशी भेंट करें और दक्षिणा दें।

तृतीय माता चंद्रघंटा
पूजन व भोजन कराने के बाद कन्याओं को आईना, रोली और खिलौना आदि भेंट करें।

चतुर्थ माता कूष्मांडा
कन्याओं को भोजन खिलाने के साथ ही मिठाई भी खिलाएं। साथ ही कोल्ड क्रीम भेंट करें।

पंचम संकन्दमाता
कन्या को भोजन कराने के बाद सोने या चांदी की चीज भेंट करें।

षष्ठम माता कात्यायनी
भोजन कराने के बाद कन्याओं को फूल और फल के साथ ही दक्षिणा दें।

सप्तम माता कालरात्रि
भोजन कराने के बाद कन्याओं को रुमाल और खुशबूदार कोई वस्तु भेंट करें।

अष्टम माता महागौरी
कन्याओं को परम्परागत भोजन कराने के साथ ही मिठाई, हलवा व दक्षिणा दें।

नवम माता सिद्धिदात्री
इस दिन नौ कन्याओं या इससे अधिक कन्याओं का पूजन कर भोजन कराएं और कन्याओं को वस्त्र, रूपये, भोज्य पदार्थ आदि उपहार में दें। इसी दिन आप ऊपर दिए गए उपहार नौ कन्याओं को भेंट कर सकते हैं।
DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)
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