Sharad Purnima-2022: शरद पूर्णिमा का रविवार कनेक्शन, करें सूर्य आराधना, नए कार्य की शुरूआत के लिए है ये सबसे शुभ दिन, देखें कथा, जानें क्यों कहा गया है इसे रासोत्सव
शरद पूर्णिमा विशेष। आश्वनि मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। इस बार यह पूर्णिमा रविवार 9 अक्टूबर को पड़ रही है। रविवार होने के कारण इस बार की पूर्णिमा और भी महत्वपूर्ण बन पड़ी है। क्योंकि रविवार सूर्य भगवान का दिन है और शरद पूर्णिमा चंद्रमा से जुड़ा त्योहार है।
इसलिए आचार्यों की मानें तो इस दिन किसी भी नए काम को शुरू करेंगे तो हमेशा सफल रहेंगे। इसे रास पूर्णिमा भी कहते हैं। चूंकि पूरे साल भर में केवल इसी दिन चंद्रमा षोडश कलाओं का होता है, इसीलिए धर्मशास्त्रों में इस दिन को कोजागर व्रत के रूप में भी माना गया है। इसी को कौमुदी व्रत भी कहते हैं। इसी दिन से कार्तिक मास व्रत औऱ स्नान नियम की शुरुआत भी हो जाती है।
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि इस बार शरदपूर्णिमा रविवार को पड़ रही है, जो कि सूर्य भगवान का दिन है और शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है, जो कि भगवान श्रीकृष्ण से सम्बंधित है। मान्यता है कि ऐसे शुभ दिन पर अगर आप बिजनेस शुरू करना चाहते या विद्यार्थी किसी शैक्षिक संस्थान में दाखिला लेना चाहते हैं, या फिर आप किसी नौकरी के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो इस दिन इन सभी कार्यों की शुरुआत कर सकते हैं। इस दिन शुरू किए कार्य में आपको सफलता मिलेगी।
जानें क्यों कहा गया है इस दिन को रासोत्सव
शरद पूर्णिमा को रासोत्सव का दिन भी कहा गया है। दरअसल इस दिन को भगवान श्रीकृष्ण ने संसार की भलाई के लिए निर्धारित किया है। मान्यता है कि इस दिन श्रीकृष्ण को कार्तिक स्नान करते वक्त भगवान कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए देवी पूजा करने वाली कुमारियों को चीर हरण के मौके पर दिए वरदान की याद आई थी। इसी के चलते उन्होंने मुरलीवादन करके यमुना तट पर गोपियों के संग रास रचाया था। इसलिए इसे रासोत्सव का दिन माना गया है।
कहते हैं कि इस दिन रात को चंद्रमा की किरणों से सुधा (अमृत) बरसता है,इसीलिए इस दिन रात को गाय के दूध से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे रखने की परम्परा भी हिंदू धर्म में सदियों से चली आ रही है।
यहां पढ़ें कथा


DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)