Devuthani Ekadashi-2022: हरिप्रबोधिनी एकादशी 4 नवम्बर को, भगवान विष्णु को उठाएं इस मंत्र से, पढ़ें कथा, देखें इस दिन क्या करना है और क्या नहीं

November 2, 2022 by No Comments

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एकादशी विशेष। हिंदू धर्म में कार्तिक मास की एकादशी को सभी एकदशियों में सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा माना गया है। इसीलिए इस एकादशी के कई नाम है। इसे देवउठनी, हरिप्रबोधिनी और देवोत्थानी एकादशी भी कहा जाता है। इस एकादशी का विशेष महत्व सनातन धर्म में माना गया है।

इस बार यह एकादशी 4 नवम्बर को पड़ रही है। आचार्य महादेव तिवारी बताते हैं कि मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी की तिथि को विष्णु भगवान क्षीर सागर में सोने चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी पर वह उठते हैं। इसी वजह से हिंदू समाज में आषाढ़ की देवशयनी एकादशी से लेकर देव उठनी एकदशी तक (करीब चार महीने तक) विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं किए जाते और देवउठनी एकादशी के बाद से ये मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं।

आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं इस दिन तुलसी माता (पौधे) का विवाह शालिग्राम से करने की भी परम्परा चली आ रही है। इसी के साथ इस दिन से लेकर भीष्म पंचक तक व्रत करने का भी विधान बताया गया है। दरअसल हिंदू धर्म ग्रंथों में कार्तिक मास का एक अलग ही महत्व बताया गया है। कहते हैं जो लोग इस महीने प्रतिदिन गंगा स्नान करते हैं, उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।

देखें इस दिन क्या करें, क्या न करें
देवउठनी एकादशी को व्रत (उपवास) रखें।
श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। इसके घर में सुख शांति बनी रहती है।
राम रामेति रामेति।रमे रामे मनोरमे। सहस्त्र नाम त तुल्यं।राम नाम वरानने। एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है।
एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।
एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है। एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।
जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।
देवोत्थान एकादशी के दिन भगवान विष्णु को उठो देवा, बैठो देवा, अंगुरिया चटकाओ देवा। कहकर उठाया जाता है। या फिर नीचे दिए गए मंत्र से भी भगवान को जगा सकते हैं।

उतिष्ठ-उतिष्ठ गोविन्द, उतिष्ठ गरुड़ध्वज।
उतिष्ठ कमलकांत, त्रैलोक्यं मंगलम कुरु।।

भगवान विष्णु को जगाने के समय परिवार के सभी सदस्य एकत्र हो जाएं और घंटे-घड़ियाल व शंख बजाकर भगवान को जगाएं।

प्रचलित कथा
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि देवउठनी एकादशी को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलित है। ऐसी मान्यता है कि भगवान नारायण जी (विष्णु जी) से एक दिन लक्ष्मी जी ने कहा कि हे नाथ, आप दिन-रात जागा करते हैं और अगर सो जाते हैं तो लाखों-करोड़ों वर्ष तक के लिए सो जाते हैं। इसी के साथ उस समय सभी चराचर का नाश भी कर डालते हैं। इसलिए आप प्रतिवर्ष नियम से सोया करें। इससे मुझे भी कुछ समय के लिए विश्राम करने का समय मिल जाएगा। यह बात सुनकर नारायण जी मुस्कुराए और बोले कि देवी तुमने ठीक कहा। मेरे जागने से सभी देवों, खासकर तुम्हें भी कष्ट होता है। मेरी सेवा से जरा भी अवकाश तुम्हें नहीं मिलता। इसलिए तुम्हारे कहने पर मैं प्रतिवर्ष चार महीने वर्षा ऋतु के समय शयन करुंगा उस समय तुमको और देवगणों को अवकाश होगा। मेरी यह निद्रा अल्पनिद्रा और प्रलयकालीन महानिद्रा कहलाएगी। भक्तों को मेरी यह निद्रा मंगलकारी होगी। इस दौरान जो भक्त मेरे शयन की भावना कर मेरी सेवा करेंगे मैं उनके घर में निवास करुंगा।

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)