प्राचीन काल में महिष्मती नगरी में महीजित नाम का एक धर्मात्मा राजा शासन करता था. वह बहुत ही शांतिप्रिय, दानवीर और ज्ञानी थी.
इस दिन व्रत रखना भी अच्छा माना गया है. मान्यता है कि इस दिन व्रत-पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
Nirjala Ekadashi: इतने घंटे पानी न पीने का है विधान…जानें निर्जला एकादशी के व्रत का विधान; पढ़ें कथा
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जो पूरे साल की एकादशी का व्रत नहीं करते हैं लेकिन साल में एक बार निर्जला एकादशी का व्रत जरूर करते हैं.
इस पर भालू कुछ देर तक तो राजा का पैर चबाता रहा और फिर राजा को घसीटकर पास के जंगल में ले गया.
इस दिन कष्टों से मुक्ति के लिए पक्षियों को दाना डालें. इसके अलावा ऊँ श्री श्रीहरये नम:’ मंत्र का जाप करते हुए पूजा करें इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होंगे.
इसके अलावा इस दिन किसी की बुराई, परनिन्दा, चोरी, दूराचार, ब्राह्मणद्रोही, नास्तिक आदि की बातें नहीं करना चाहिए, अगर भूल से कोई गलती हो जाती है तो सूर्य के सामने स्थित होकर प्रार्थना करनी चाहिए.
एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते भी नहीं तोड़ने चाहिए. शास्त्रों में कहा गया है कि अगर आपको तुलसी के पत्ते चाहिए, तो एक दिन पहले ही तोड़ कर रख लें. मान्यता है कि भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का होना जरूरी है.
इस एकादशी को तुलसी एकादशी भी कहते हैं। ये तो सभी जानते हैं कि तुलसी पौधे की महिमा वैद्यक ग्रंथों के साथ-साथ धर्मशास्त्रों में भी बढ़-चढ़कर की गई है।
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