Adhikamas-2023: अधिकमास के दौरान करें ये काम, कभी नहीं होगी पैसे की कमी, जानें मलमास में क्या करना चाहिए और क्या नहीं
Adhikamas-2023: 18 जुलाई से अधिकमास शुरू हो गया है. इसे पुरुषोत्तम मास व अधिमास भी कहते हैं. 16 अगस्त तक अधिक मास रहेगा. आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि, अधिक मास में सूर्य की सक्रांति (सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश) न होने से इसे ‘मल मास’ कहा गया है। यह मास देव-पितर आदि की पूजा तथा मंगल कर्मों के लिए त्याज्य माना गया।
आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि, पुरुषोत्तम मास मे घर पर सायंकाल दीपक जरूर जलाए कभी पैसे की कमी नही होगी। वह कहते हैं कि इस महीने जो जप, सत्संग, ध्यान, पुण्य आदि करेंगे, उन्हें विशेष फायदा होगा। इस मास में आँवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करना अधिक प्रसन्नता और स्वास्थ्य देता है।
आँवले व पीपल के पेड़ को स्पर्श करने से स्नान करने का पुण्य होता है, सात्त्विकता और प्रसन्नता की बढ़ोतरी होती है। इन्हें स्नान करने के बाद स्पर्श करने से दुगुना पुण्य होता है।
इस मास में धरती पर (बिस्तर बिछाकर) शयन व पलाश की पत्तल पर भोजन करे और ब्रह्मचर्य व्रत पाले तो पापनाशिनी ऊर्जा बढ़ती है और व्यक्तित्व में निखार आता है।इस पुरुषोत्तम मास को कई वरदान प्राप्त हैं और शुभ कर्म करने हेतु इसकी महिमा अपरम्पार है।
अधिक मास में ये करें काम
आँवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करना अधिक प्रसन्नता और स्वास्थ्य देता है।
भगवन्नाम-जप, कीर्तन, भगवद-स्मरण, ध्यान, दान, स्नान आदि तथा पुत्रजन्म के कृत्य, पितृमरण के श्राद्ध आदि एवं गर्भाधान, पुंसवन जैसे संस्कार किये जा सकते हैं ।
दीपक-दान से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, दुख-शोकों का नाश होता है, वंश बढ़ता है, ऊँचा सान्निध्य मिलता है, आयु बढ़ती है ।
‘देवी भागवत’ के अनुसार यदि दान आदि का सामर्थ्य न हो तो संतों-महापुरुषों की सेवा (उनके दैवीकार्य में सहभागी होना) सर्वोत्तम है । इससे तीर्थस्नान, तप आदि के समान फल प्राप्त होता है।
इस मास में किये गये निष्काम कर्म कई गुना विशेष फल देते हैं।
भक्तिपूर्वक सदगुरु से अध्यात्म विद्या का श्रवण करने से ब्रह्महत्या जनित भयंकर पाप भी नष्ट हो जाते हैं तथा दिन-प्रतिदिन अश्वमेधयज्ञ का फल प्राप्त होता है । निष्काम भाव से यदि श्रवण किया जाय तो जीव मुक्त हो जाता है।
भूमिपर (चटाई, कम्बल, चादर आदि बिछाकर) शयन, पलाश की पत्तल पर भोजन करने और ब्रह्मचर्य व्रत पालनेवाले की पापनाशिनी ऊर्जा बढ़ती है तथा व्यक्तित्त्व में निखार आता है।
अधिक मास में न करें ये काम
इस मास में शादी-विवाह अथवा सकाम कर्म एवं सकाम व्रत वर्जित हैं। जैसे कुएँ, बावली, तालाब और बाग़ आदि का आरम्भ तथा प्रतिष्ठा, नवविवाहिता वधू का प्रवेश, देवताओं का स्थापन (देव-प्रतिष्ठा), यज्ञोपवीत संस्कार, नामकरण, मकान बनाना, नये वस्त्र एवं अलंकार पहनना आदि। इस मास में किये गये निष्काम कर्म कई गुना विशेष फल देते हैं।
पुरुषोत्तम मास व चतुर्मास में नीच कर्मो का त्याग करना चाहिए ।
इस मास में विवाह अथवा सकाम कर्म एवं सकाम व्रत वर्जित हैं।अत: कर्म संसारी कामनापूर्ति के लिए नहीं, ईश्वर के लिए करना।
मकान-दुकान नहीं बनाये जाते तथा पोखरे, बावड़ी, तालाब, कुएँ नहीं खुदवाये जाते हैं ।
अधिक मास के व्रत का महत्व
प्रातः स्नान कर भगवान का पूजन करें। यथाशक्ति दान पुण्य करें और भगवन्नाम जप करें। फलाहार आदि करें।
10 हजार वर्ष गंगा-स्नान करने से अथवा 12 वर्ष में आने वाले सिंहस्थ कुम्भ में स्नान से जो पुण्य होता है वही पुण्य पुरुषोत्तम मास में प्रात:काल स्नान करने से हो जाता है।
यह मास शारीरिक-मानसिक आरोग्य और बौद्धिक विश्रांति देने में सहायता करेगा।भजन-ध्यान अधिक करके पुरुषोत्तमस्वरूप परमात्मा को पाने में यह मास मददरूप है।
DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)