Ashok Vrat: शारदीय नवरात्र के पहले दिन रखें अशोक व्रत..इस दिन नहीं की जाती है मूर्ति की पूजा
Ashok Vrat: माता पार्वती को ही मां भगवती का रूप माना गया है। इसलिए मान्यता है कि अगर शारदीय नवरात्र के पहले दिन पड़ने वाले अशोक व्रत को जो करता है, उसे भगवान शिव के साथ ही मां भगवती की भी कृपा प्राप्त होती है। क्योंकि यह व्रत भोले बाबा के लिए ही किया जाता है और इस दिन अशोक के वृक्ष की पूजा करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है।
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि भगवान शिव की विशेष आराधना के रूप में पहले शारदीय नवरात्र को यह व्रत किया जाता है। इस दिन अशोक के वृक्ष की पूजा करनी चाहिए। जो इस व्रत को करता है, शिवजी उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। ऐसा व्यक्ति अंत में शिवलोक को जाता है। इस व्रत में किसी मूर्ति की नहीं, बल्कि अशोक के पेड़ की पूजा करने का विधान है।
इस तरह करें पूजा
अशोक के पेड़ पर जल चढ़ाएं। इसके बाद हल्दी, रोली, चावल, कलावा आदि से पूजन करके दीपक जलाएं व अर्घ्य दें। फिर प्रसाद के रूप में घी, गुड़ चढ़ाते हैं। घी को अशोक के तने पर चढ़ाकर कलावा बांधें और फिर गुड़ को जड़ों के पास रख दें। मान्यता है कि 12 वर्षों तक इसी प्रकार से पूजन करने के बाद सोने (स्वर्ण-GOLD) का अशोक वृक्ष बनवाकर, उसका पूजन करके अपने कुलगुरु को समर्पित करें।
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