UP Assembly Monsoon Session: 43 साल बाद योगी ने यूपी विधानसभा में पेश की मुरादाबाद दंगे की रिपोर्ट, हुआ बड़ा खुलासा, मुस्लिम लीग के दो नेताओं ने भड़काई थी दंगे की आग, पढ़ें पूरी रिपोर्ट एक नजर में, देखें वीडियो
UP Assembly Monsoon Session: यूपी विधानसभा मानसून सत्र का दूसरा दिन सरकार के लिए खास रहा. अपने फैसले के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को 43 साल बाद मुरादाबाद दंगों की एसआईटी जांच रिपोर्ट सदन में पेश की और मुरादाबाद में हुई घटना के असली गुनाहगारों के नाम खोले. बता दें कि इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के लिए योगी पहले ही कह चुके थे, इस पर सपा और कांग्रेस ने विरोध भी किया था. तो वहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि, मुस्लिम लीग के दो नेताओं के राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते दंगे की आग लगाई थी.
ईद के दिन शुरू हुआ था दंगा
मिली जानकारी के मुताबिक उस समय राज्य में वीपी सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार थी और सबसे खास बात ये है कि ये दंगा ईद के दिन शुरू हुआ था. इस दंगे में लगभग 83 लोगों की जान गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे. जांच आयोग ने नवंबर 1983 में मुरादाबाद में हुए इन दंगों की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी, लेकिन पिछली सरकारों ने कभी इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया.
20 फरवरी 1983 को सौंपी गई थी जांच
मीडिया सूत्रों की मानें तो 1980 अगस्त में मुरादाबाद की ईदगाह में दंगा भड़का था. इस दंगे में मुस्लिम समुदाय ने स्थानीय दुकानों पर हमला कर दिया था और फिर लोगों को मारा जाने लगा था, जिसमें बड़ी संख्या में मुस्लिमों की मौत हो गई थी. जानकारी सामने आई है कि, वाल्मीकि समुदाय और मुस्लिम आमने सामने आ गए थे. दंगों की जांच के लिए जस्टिस सक्सेना की कमेटी ने रिपोर्ट बनाई गई थी और 20 फरवरी 1983 को जांच रिपोर्ट सौंप दी गई थी.
पूरी रिपोर्ट की मुख्य बातें पढ़ें एक नजर में
मुस्लिम लीग के दो नेताओं ने राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के कारण दंगा हुआ.
डॉक्टर शमीम अहमद के नेतृत्व वाली मुस्लिम लीग और डॉक्टर हामिद हुसैन उर्फ डॉक्टर अज्जी के नेतृत्व वाले खाकसारो तथा उनके समर्थकों और भाड़े के व्यक्तियों ने दंगे को अंजाम दिया था.
नमाजियों के बीच में सूअर धकेल दिए जाने की अफवाह फैलने के बाद क्रोधित मुसलमानों ने थाने पुलिस चौकी और हिंदुओं पर हमला बोल दिया था.
ईदगाह और अन्य स्थानों पर गड़बड़ी पैदा करने के लिए इस दंगे में कोई भी सरकारी अधिकारी कर्मचारी या हिंदू उत्तरदाई नहीं था.
दंगों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या भारतीय जनता पार्टी की भूमिका कहीं भी सामने नहीं आई है.
आम मुसलमान भी ईदगाह पर उपद्रव करने के लिए उत्तरदाई नहीं था.
रिपोर्ट में कहा गया है कि, यह पूरा दंगा पूर्व नियोजित था और मुस्लिम नेताओं की दिमाग की उपज था.
फल स्वरूप हिंदुओं ने भी बदला लिया जिस पर संप्रदायिक दंगा भड़का था.
भगदड़ में अल्पसंख्यक समुदाय के अधिक संख्या में लोग मारे गए थे.