Court News: “अगर पत्नी किसी अन्य के साथ घूम रही है तो ये व्यभिचार नहीं”, कोर्ट ने खारिज की पति की तलाक की मांग वाली याचिका, देखें पत्नी ने क्या लगाए आरोप

November 4, 2022 by No Comments

Share News

अगर पत्नी पति के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के साथ घूमती है या मिलती-जुलती है तो ये व्यभिचार नहीं है। यह कहते हुए कोर्ट ने पति की तलाक मांगने वाली याचिका खारिज कर दी। मामला मध्य प्रदेश का है।

विधि समाचारों की वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक मामले में निर्णय करते हुए कहा कि पत्नी का पति के अलावा किसी दूसरे व्यक्ति से मिलना या उसके साथ घूमना व्यभिचार (Adultery) नहीं है। जस्टिस विवेक रूस और जस्टिस अमर नाथ (केशरवानी) की पीठ ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें पति द्वारा क्रूरता और व्यभिचार के आधार हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(1)(1ए) के तहत तलाक की मांग वाली याचिका खारिज कर दी गई।

जानें कोर्ट ने क्या की टिप्पणी
कोर्ट ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, “यह एक स्थापित कानून है कि केवल पति के अलावा किसी अन्य पुरुष के साथ घूमना पत्नी के खिलाफ व्यभिचार नहीं है। यह स्थापित करने के लिए प्रत्यक्ष प्रमाण होना चाहिए कि वह अपने पति के अलावा किसी अन्य के साथ समझौता या व्यभिचार में देखी गई। तभी व्यभिचार के आरोप को स्थापित कहा जा सकता है। केवल पति के अलावा किसी अन्य व्यक्ति से मिलना या घूमना व्यभिचार नहीं है। इसलिए ट्रायल कोर्ट ने सही माना है कि क्रूरता का आरोप स्थापित नहीं किया गया है।”

जानें क्या है मामला
दरअसल एक पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल कर व्यभिचार और क्रूरता के आधार पर शादी को खत्म करने की मांग की थी। पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी (प्रतिवादी) किसी अन्य व्यक्ति के साथ रह रही है। उसने अपनी मां के साथ मारपीट की जिसके लिए उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी, इसलिए वह व्यभिचार और क्रूरता के आधार पर तलाक का हकदार है। व्यभिचार के आरोपों को साबित करने के लिए पति ने कहा कि उसने अपनी पत्नी को एक आदमी के घर जाते देखा। उन्होंने यह स्थापित करने के लिए 3 अन्य गवाहों से भी पूछताछ की कि उन्होंने कई मौकों पर उक्त व्यक्ति के साथ प्रतिवादी/पत्नी को भी देखा था।

पत्नी ने देखें क्या लगाए आरोप
इस मामले में आगे यह तर्क दिया गया कि उसकी पत्नी को सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण से वंचित कर दिया गया था क्योंकि अदालत ने उसके चरित्र पर संदेह किया था। तो दूसरी ओर पत्नी ने सारे आरोपों को खारिज करते हुए लिखित बयान दर्ज कराते हुए कहा कि उसके पति (अपीलकर्ता) की दूसरी शादी में दिलचस्पी थी, इसलिए उसने उसे छोड़ दिया। उसने यह भी स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया कि वह अभी भी एक पत्नी के रूप में उसके साथ रहने और वैवाहिक दायित्वों को निभाने के लिए तैयार है। इसके बाद तमाम तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने तलाक की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। (फोटो-सोशल मीडिया)