Deepawali-2022: दीपावली सोमवार को, सुख-समृद्धि, धन व वैभव के लिए करें ये पांच सरल उपाय, देखें पूजन शुभ मुहूर्त और पढ़ें कथा
दीपावली विशेष। प्रतिवर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या को दीपावली (लक्ष्मी पूजन) का त्योहार सनातन धर्म में मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार 24 अक्टूबर दिन सोमवार को पड़ रहा है। दीपावली त्योहार का आगमन धनतेरस से ही हो जाता है और दीपावली के दिन इस त्योहार की रौनक देखते ही बनती है।
लोग अपने घरों को दीया, मोम्बत्ती व बिजली की झालरों से सजाकर रोशनी करते हैं और माता लक्ष्मी जी की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। घरों से लेकर दुकाने व मार्ग से लेकर पेड़-पौधों पर लोग साज-सज्जा करते हैं और रंगोली व तोरण से घरों का मुख्य द्वार सजाते हैं। मान्यता है कि जिस घर का द्वार सुंदर व साफ-स्वच्छ होता है वहां माता लक्ष्मी जाती है और उस घर पर धन वर्षा करती हैं। अर्थात उस घर में कभी भी धन की कमी नहीं रहती।
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि ब्राह्मपुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या की अर्धरात्रि में माता लक्ष्मी खुद ही धरती पर आती हैं और प्रत्येक सद्गृहस्थ के घर पर वितरण करती हैं। जो घर साफ व सुंदर तरीके से प्रकाश से सजा होता है वहां अंश रूप में ठहर जाती हैं और गंदे स्थानों की तरफ देखती भी नहीं हैं। मान्यता है कि दीपावली मनाने से सद्गृहस्थों के घर पर लक्ष्मी जी स्थायी रूप से निवास करती हैं। वास्तव में धनतेरस, नरक चतुर्दशी और महालक्ष्मी पूजन, इन तीनों पर्वों का मिश्रण ही दीपावली है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान राम 14 वर्ष का वनवास काटकर व रावण आदि राक्षसों का वध करके अयोध्या लौटे थे। इसीलिए दीपोत्सव मनाया जाता है। इस दिन उत्तर प्रदेश के अयोध्या में दीपों का खास आयोजन किया जाता है।
आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि अगर दीपावली के दिन कुछ खास उपाय कर लिए जाएं तो वर्षभर माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगा और घर में सुख-समृद्धि का निवास होगा।
दिवाली पर करें ये उपाय
दीपावली के दिन रात भर घी का दिया जलाएं। दीपक ऐसे जलाएं कि दूसरे दिन सूर्योदय तक प्रज्ज्वलित होता रहे। मान्यता है कि ये घर-परिवार के लिए शुभ होता है।
दीपावली के दिन चांदी की कटोरी में अगर कपूर को जलायें, तो परिवार में तीनों तापों से रक्षा होती।
हर अमावस्या को और दिवाली को भी पीपल के पेड़ के नीचे दिया जलाने से पितृ और देवता प्रसन्न होते हैं, और अच्छी आत्माएं घर में जन्म लेती हैं।
नूतन वर्ष के दिन दीपावली के अगले दिन, गाय के खुर की मिट्टी से अथवा तुलसीजी की मिट्टी से तिलक करें, सुख-शान्ति में बरकत होगी।
दीपावली की सायं को अशोक वृक्ष के नीचे घी का दिया जलायें, तो बहुत शुभ माना जाता है।
देखें पूजन शुभ मुहूर्त
आचार्य महादेव तिवारी के अनुसार,
“दिन में स्थिर कुम्भ लग्न 1 बजकर 59 मिनट से 3 बजकर 32 मिनट तक।
सर्वोत्तम स्थिर बृष लग्न सायं 06 बजकर 42 मिनट से 08 बजकर 41 मिनट तक।
श्रेष्ठ महानिशा में स्थिर सिंह लग्न 01 बजकर 04 मिनट से 03 बजकर 21 मिनट तक। विशेष लक्ष्मी पूजन किया जायेगा और तंत्र जगत के लोग भी विशेष पूजन करेंगे।”
इसी के साथ आचार्य संतोष पाधा बताते हैं कि अमृत काल सुबह 6 बजकर 35 मिनट से 7 बजकर 52 मिनट, शुभ बेला सुबह 9 बजकर 18 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 45 मिनट स 12 बजकर 34 मिनट तक भी माता लक्ष्मी जी की पूजा की जा सकती है।
पढ़ें दीपावली की कथा


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