Delhi Blast: दिल्ली ब्लास्ट से पहले आतंकी उमर ने की थी आतंकवाद की वकालत… अंग्रेजी में तकरीर का Video वायरल

November 18, 2025 by No Comments

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Delhi Blast: भारत की राजधानी दिल्ली में हुए ब्लास्ट से पहले दिल्ली में फिदायिन हमला करने वाले आतंकी डॉक्टर उमर मोहम्मद नबी ने अंग्रेजी में सेल्फी वीडियो बनाया था जो कि अब सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वह बेफिक्र होकर शहीद होने की बात करता हुआ दिख रहा है. इस वीडियो ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. दरअसल इस वीडियो में उमर अंग्रेजी में आतंकवाद की वकालत करते हुए दिख रहा है और आत्मघाती बमबारी को सही बता रहा है. वीडियो में उमर अकेला दिखाई दे रहा है और वह किसी कमरे में बैठा हुआ वीडियो को रिकॉर्ड करते दिख रहा है.

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो इस बात की पुष्टि कर रहा है कि दिल्ली कार विस्फोट की प्लानिंग बहुत सोच-समझकर की गई थी. इसी के साथ ही अब ये वीडियो उन अटकलों को विराम देता है जिसमें कहा जा रहा था कि विस्फोटकों को ले जाते समय यह अनजाने में हुआ होगा. यह घटना भारत में सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक गंभीर चुनौती पेश कर रही है, जो ऐसे कट्टरपंथी तत्वों से निपटने की रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर हैं.

क्या कहा है वीडियो में?

वीडियो में उमर आत्मघाती हमलों का मतलब समाझाते हुए दिख रहा है. उसने जो अंग्रेजी में कहा है, उसकी हिंदी अनुवाद यहां लिखा जा रहा है, उसने कहा लोग आत्मघाती बम विस्फोट का असली मतलब नहीं समझ पाते. इसके विचार की मूल भावना को समझने में असफल रहते हैं. उसने इस बात को स्वीकार किया कि इसके खिलाफ कई तरह के विरोधाभास और अनगिनत तर्क मौजूद हैं.

उसने कहा “जिसे आत्मघाती बम विस्फोट कहा जाता है, वह अवधारणा बहुत ही गलतफहमी में से एक है. यह एक शहादत अभियान है. जिसे इस्लाम में जाना जाता है.” उमर ने वीडियो में ये भी कहा है कि “शहादत” अभियान वह होता है जिसमें व्यक्ति यह मान लेता है कि उसकी मौत किसी खास जगह और समय पर होगी तो वह एक खतरनाक मानसिक अवस्था में पहुंच जाता है. वह मानने लगता है कि मौत ही उसका अंतिम लक्ष्य है. इसी के साथ ही उसने इस बात को स्वीकार किया और कहा कि इस अवधारणा के खिलाफ कई तर्क दिए गए हैं, और इसमें विरोधाभास भी है.

वह ये भी कहता है कि कोई भी व्यक्ति सटीक भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि उसकी मौत कब और कहां होगी और यह तभी संभव है जब यह नियति में लिखा हो. इसी के साथ ही उसने अपने वीडियो संदेश में कहा कि “मौत से मत डरो.

भारत में उग रही शिक्षित आतंकवादियों की पौध

इस घटना के बाद तो ये बात साफ ही हो गई थी कि भारत में शिक्षित आतंकवादियों की पौध उग रही है तो वहीं अब इस वीडियो से उमर मोहम्मद का अंग्रेजी लहजा जो कि पूरी तरह से अलग और स्पष्ट है. इससे साफ होता है कि वह आत्मघाती बम विस्फोट और “शहादत” जैसे विषयों पर गहराई से विचार करता था. इससे उसकी कट्टरपंथी सोच जाहिर हो रही है और एक शांत और संयमित व्यक्ति द्वारा जघन्य कृत्य को सही ठहराने का यह वीडियो, भारत में आतंकवाद के एक नए, शिक्षित, कट्टरपंथी चेहरे को सामने लाता है.

जांच में अभी तक मिला ये सब

सूत्रों की मानें तो जांच में अभी तक की पता चला है कि कुल 68 संदिग्ध मोबाइल नंबर सुनहरी बाग पार्किंग और बम धमाके वाली जगह पर एक्टिव थे. यही 68 मोबाइल नंबर अब जांच का केंद्र बन गए हैं. सूत्रों की मानें तो इन नंबरों पर पाकिस्तान और तुर्किये से कॉल आई थीं. फिलहाल जांच एजेंसियां पाकिस्तान और तुर्किये से आने वाली कॉल, इंटरनेट रूटिंग और विदेशी सर्वर से जुड़ रहे फोन पर विशेष निगरानी रखना शुरू कर दिया है. धमाके के बाद पुलिस ने सुनहरी बाग और लाल किला के पास मोबाइल टॉवर से डंप डाटा उठाया है जिसकी मदद से कई तकनीकी जानकारियां सामने आई हैं. अब जांच उसके आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है.

पार्किंग में 3 घंटे तक खड़ी रही उमर की कार

सूत्रों की मानें तो सबसे अहम जानकारी विस्तृत फोन-मैपिंग के जरिये मिली है. संदिग्ध नंबरों पर धमाके से ठीक पहले भारतीय नेटवर्क पर असामान्य डेटा-स्पाइक्स (डाटा का आदान-प्रदान हुआ) दर्ज कराया गया. डॉ. उमर की कार सुनहरी बाग पार्किंग में तीन घंटे से अधिक समय तक खड़ी रही उस दौरान उसके 30 मीटर के दायरे में 187 फोन नंबर सक्रिय पाए गए. तो वहीं बम विस्फोट जहां हुआ वहां पर पांच मिनट पहले और पांच मिनट बाद कुल 912 फोन सक्रिय पाए गए हैं. दोनों स्थानों की डिजिटल लोकेशन-हिस्ट्री के मिलान में कुल 68 मोबाइल नंबर ऐसे पाए गए हैं जो दोनों जगह पर उसी समय सक्रिय थे. यही 68 नंबर जांच का केंद्र बन गए हैं.

जांच एजेंसियां जुटी इस कार्य में

सूत्रों के मुताबिक, इनमें से कई नंबर ऐसे थे जो एक ही विदेशी सर्वर से लिंक मिले जिसने पाकिस्तान और तुर्किये दोनों देशों के आइपी-क्लस्टर के बीच लगातार स्विच ओवर दिखाया है. इसको लेकर जांच एजेंसियां आशंका जता रही हैं कि इन सबके के लिए अलग-अलग प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल हुआ. हालांकि जांच एजेंसियां ये पता लगाने में जुटी हैं कि कौन-कौन से फोन विस्फोट से कुछ मिनट पहले किस विदेशी आईपी से लिंक हुए. शुरुआती जांच में घटना स्थल पर मौजूद दो फोन ऐसे मिले हैं, जिनमें मिनट-टू-मिनट लोकेशन शिफ्ट हुई. इससे ये संकेत मिलता है कि फोन कोस्पूफ’ (यानी दूसरे नेटवर्क पर डाला गया) किया गया. इसको लेकर जांच एजेंसियों की जांच आगे जारी है.

10 नवम्बर को दिल्ली में हुआ था धमाका

बता दें कि 10 नवम्बर 2025 को दिल्ली के लाल किला के पास बम धमाका हुआ जिसमें अब तक 15 लोग मारे जा चुके हैं. इसमें से कुछ की मौत अस्पताल में इलाज के दौरान हुई है. घटना में करीब 20 से अधिक लोग बुरी तरह जख्मी हुए हैं. लाल किला के पास हुए बम धमाके की जांच के दौरान पुलिस को कुछ चौंकाने वाले सुराग मिले हैं.

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