Dev Deepawali 2022: देव दीपावली और तुलसी पूजन 7 नवम्बर को, जानें शुभ मुहूर्त और दीपदान का महत्व, पढ़ें कथा, देखें इस दिन बैल, हाथी, घोड़ा, घी और गाय दान करने से किस चीज की होती है प्राप्ति

November 5, 2022 by No Comments

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देव दीपावली विशेष। कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को तुलसी पूजन व देवदीपावली मनाने की परम्परा सदियों से चली आ रही है। इस बार देव दीपावली और तुलसी पूजन 7 नवम्बर को मनाया जाएगा, क्योंकि 8 नवम्बर कार्तिक पूर्णिमा को चंद्रग्रहण हो रहा है। ऐसे में व्रत की पूर्णिमा, त्रिपुरोत्सव और देवदीपावली का आयोजन 7 नवम्बर, दिन सोमवार को ही किया जाएगा।

बता दें कि कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरोत्सव और त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था, जिसकी खुशी में इस त्योहार को मनाया जाता है। चूंकि इस बार देव दीपावली सोमवार को अर्थात भगवान शिव के दिन पर ही पड़ रही है तो इस बार की देव दीपावली का महत्व बढ़ गया है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान व दान का विशेष महत्व होता है। देव दीपावली के दिन सूर्यास्त के बाद दीपदान भी किया जाता है। तो वहीं चंद्र ग्रहण होने के बावजूद 8 नवम्बर को स्नान व दान की पूर्णिमा मनाई जाएगी।

आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा पर संध्या समय पर भगवान का मत्स्यावतार हुआ था। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान के बाद दीपदान करने का फल दल यज्ञों के समाम होता है। ब्रह्मा, विष्णु, शिव, अंगिरा और आदित्य ने इस दिन को महापुनीत पर्व कहा है। मान्यता है कि इस दिन अगर कृतिका पर चंद्रमा और विशाखा पर सूर्य हो तो पद्मक योग होता है। इस दिन कृतिका पर चंद्रमा और बृहस्पति हो तो महापूर्णिमा कहलाती है।

इनका अवश्य करें पूजन, देखें क्या दान करने से किस चीज की होती है प्राप्ति
इस दिन चंद्रोदय पर शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा, इन 6 कृतिकाओं का जरूर पूजन करना चाहिए। मान्यता है कि कार्तिकी पूर्णिमा की रात्रि में व्रत करके बैल दान करने से शिव पद प्राप्त होता है। गाय, हाथी, घोड़ा, रथ और घी दान करने से सम्पत्ति बढ़ती है। इस दिन उपवास करके भगवान का स्मरण, चिंतन करने से अग्निष्टोम यज्ञ के समान फल मिलता है और सूर्यलोक की प्राप्ति होती है। इस दिन भेड़ दान करने से ग्रहयोग के कष्टों का नाश होता है। इस दिन कन्यादान करने से संतान व्रत पूर्ण होता है। कार्तिक व्रत करने वाले को ब्राह्मण भोज, हवन, दीपक जलाना चाहिए। कार्तिक स्नान करने के बाद राधा-कृष्ण का पूजन करना चाहिए।

कार्तिक पूर्णिमा तिथि कब से कब तक

पूर्णिमा तिथि 07 नवंबर को शाम 04 बजकर 15 मिनट से शुरू और 8 नवंबर को शाम 04 बजकर 31 मिनट पर समाप्त होगी। देव दीपावली पर पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 14 मिनट से शाम 07 बजकर 49 मिनट तक है। पूजन की कुल अवधि 2 घंटे 32 मिनट की है।

देव दीपावली 2022 शुभ संयोग

इस साल देव दीपावली पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इस दिन अभिजीत मुहूर्त व रवि योग समेत कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं।

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:53 से 05:45
अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:43 से दोपहर 12:26
विजय मुहूर्त- दोपहर 01:54 से 02:37
गोधूलि मुहूर्त- शाम 05:32 से 05:58
अमृत काल- शाम 05:15 से 06:54
रवि योग 8 नवम्बर को सुबह 06:37 से दोपहर 12:37

देव दीपावली पर दीपदान का महत्व

देव दीपावली पर दीपदान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करने के बाद ब्राह्मण भोजन कराना, दीपदान करने से पापों से मुक्ति मिलती है। घर में सुख-समृद्धि व खुशहाली आती है। क्योंकि कार्तिक की पूर्णिमा वर्ष की पवित्र पूर्णमासियों में से एक है।

पढ़ें कथा

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)