Dhanteras: धनतेरस पर किसी को कुछ भी न दें उधार…झाडू की करें ऐसे पूजा; पढ़ें कथा
Dhanteras: सनातन धर्म का लोकप्रिय त्योहारों में से एक धनतेरस का त्योहार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस बार यह 22 अक्टूबर दिन शनिवार को पड़ रहा है। भारतीय ज्योतिष अनुसन्धान संस्थान के निदेशक विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि स्कंद पुराण के अनुसार धनतेरस को दीपदान करने वाले की अकाल मृत्यु नहीं होती है। धनतेरस को लक्ष्मी का पूजन धन, सुख-शांति व आंतरिक प्रेम देता है। इसीलिए इस दिन यम-दीपदान जरूर करना चाहिए।

आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि इस दिन किसी को भी कोई वस्तु उधार न दें। ऐसा करने से साल भी धन का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी के साथ धनतेरस के दिन सींक वाली या फिर फूल झाडू खरीदकर ले आएं और उसे लाल कपड़े में लपेट दें। इसके बाद रोली, अक्षत से पूजा करें। धूपबत्ती दिखाएं और मिठाई का भोग लगाकर लक्ष्मी जी व कुबेर जी का ध्यान करके धनसम्पत्ति की कामना करें। इसके बाद इस झाड़ू को घर में ही छुपा कर रख दें ताकि किसी बाहरी की नजर न पड़े। साल भर इसे रखें और अगले धनतेरस पर जब फिर झाड़ू की इसी तरह पूजा कर लें तो इस झाडू को इस्तेमाल के लिए निकाल लें। ऐसा करने से साल भर लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहती है
धनतेरस के दिन इस तरह करें स्नान
कार्तिक मास का स्नान सबसे पवित्र और मोक्ष देने वाला बताया गया है। इसलिए धनतेरस के दिन हल जुती मिट्टी को दूध में भिगोकर उसनें सेमर की शाखा डालकर लगातार तीन बार अपने शरीर पर फेरना चाहिए और कुमकुम लगाना चाहिए। इसके बाद कार्तिक स्नान करके प्रदोष काल में घाट, गौशाला, कुंआ, बावली,मंदिर आदि स्थानों पर तीन दिन तक दीपक जलाना चाहिए। इसी के साथ तुला राशि के सूर्य में चतुर्दशी व अमावस्या की संध्या को जलती लकड़ी की मशाल से पितरों का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।
जानें क्यों खास है धनतेरस का दिन?
धनतेरस के दिन ही दीपावली से सम्बंधित सभी पूजा सामग्री, लक्ष्मी-गणेशजी की मूर्तियां, लइया, खील, खिलौने आदि की खरीदारी की जाती है। इस दिन लक्ष्मी-कुबेर की पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन लोग सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन आदि की खरीदारी करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से साल भर लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
धनतेरस पर धन्वंतरि जयंती मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के जन्मदाता धन्वंतरि वैद्य समुद्र से अमृतकलश लेकर प्रकट हुए थे। इसीलिए धनतेरस को धन्वंतरि जयंती भी कहते हैं। इस दिन वैद्य हकीम से लेकर ब्राह्मण समाज भी भगवान धन्वंतरि की पूजा करता है।
साल भर में धनतेरस का ही दिन ऐसा है, जिस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की जाती है। यमराज के निमित्त दीपक जलाया जाता है। मान्यता है कि यमराज की पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय खत्म हो जाता है और यमराज की कृपा बनी रहती है।
धनतेरस के दिन ही दीपावली को लेकर साज-सज्जा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन पुराने बर्तनों को बदलकर नए बर्तन लेने चाहिए। चांदी के बर्तन खरीदना शुभ रहता है। (फोटो-सोशल मीडिया)
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