Harish Rana Death: इच्छामृत्यु पाने वाले हरीश राणा का निधन…. 13 साल से थे कोमा में; मां ने किया हनुमान चालीसा का पाठ-Video
Harish Rana Passive Euthanasia Death: इच्छामृत्यु पाने वाले गाजियाबाद के हरीश राणा का आज दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया. सुप्रीम कोर्ट से आदेश मिलने के बाद धीरे-धीरे कर उनके सभी मेडिकल लाइफ सपोर्ट को हटा दिया गया था और 15 मार्च से ये प्रक्रिया शुरू हुई थी तो वहीं आज 24 मार्च को उनका निधन हो गया है.
वह बीते 13 साल से कोमा में थे और इतने सालों तक पिता किसी चमत्कार का इंतजार कर रहे थे लेकिन जब बेटा ठीक नहीं हुआ तो वह इच्छामृत्यु के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
पहले वह दिल्ली हाईकोर्ट गए थे जहां उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सभी मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद इच्छा मृत्यु के लिए आदेश के दिया था. हरीश राणा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल (आईआरसीएच) में भर्ती थे और उनको उपशामक देखभाल वार्ड में रखा गया था.
इसी के बाद से करीब एक हफ्ते अस्पताल लगातार उनकी निगरानी कर रहा था. 23 मार्च को डॉक्टरों ने उन्हें कुछ दिन और निगरानी में रखे जाने की बात कही थी. हरीश राणा पिछले एक हफ्ते से बिना खाना और पानी के जीवित थे. यह प्रक्रिया छह दिनों से चल रही थी.
वह मुझे छोड़कर जा रहा है
तो वहीं आज हरीश की मां अस्पताल के गलियारे में बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ कर रही थीं और उनकी आंखों से लगातार आंसू गिर रहे थे. बेटे को हमेशा के लिए खुद से दूर जाते वह देख रही थीं. वह बोलीं मेरा बेटा सांस ले रहा है. उसकी धड़कन अभी भी चल रही है. वह मुझे छोड़कर जा रहा है. इतना कहते ही वह रोने लगीं.
सुप्रीम कोर्ट ने दी थी इजाजत
बता दें कि हरीश के पिता को ये चिंता थी कि 13 साल से बेटा ठीक नहीं हुआ और अब वे बूढ़े हो रहे हैं, उनके बाद बेटे की कौन देखभाल करेगा. इसी चिंता के साथ वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे जहां इच्छामृत्यु की इजाजत मिलने के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई थी. डॉक्टरों की एक विशेष टीम लगातार हरीश की स्थिति पर लगातार नजर रख रही थी क्योंकि यह एक संवेदनशील और जटिल मामला था. तो वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने आदेश में मरीज की गरिमा का पूरा ख्याल रखने का आदेश दिया था. एक सप्ताह तक बिना भोजन और पानी के रहने के बाद उनका निधन हुआ.
जानें क्या हुआ था हरीश के साथ?
हरीश राणा ने जुलाई 2010 में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया था और साल 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे. वह होनहार छात्र थे और अपने करियर को लेकर बहुत ही सीरियर रहते थे. बताया जाता है कि अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन वह बहन से मोबाइल फोन पर बात कर रहे थे इसी दौरान पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे जिससे उनके सिर पर गंभीर चोटे आईं थी. हरीश को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया था और बाद में दिसंबर 2013 में उसे दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित है.
11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
इस बीमारी की वजह से हरीश के हाथ-पैर पूरी तरह निष्क्रिय हो गए और वह हमेशा के लिए बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गए. इस दौरान हरीश के पिता ने बहुत इलाज कराया लेकिन हरीश ठीक नहीं हुए. इस तरह 13 साल तक माता-पिता किसी चमत्कार का इंतजार करते रहे लेकिन हरीश के शरीर में कोई सुधार नहीं हुआ. हरीश लगातार असहनीय दर्द और शारीरिक अक्षमता से गुजर रहे थे. इस पर माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की अपील की, जिसे 8 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया गया. इस पर सुप्रीम कोर्ट में पिता ने याचिका दायर की और फिर करीब आठ महीने बाद 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) के लिए अनुमति दी.
#BREAKING : Harish Rana has died at AIIMS Delhi after being in a coma for over 13 years. He was among the first individuals in India permitted passive euthanasia.#HarishRana #AIIMS #Euthanasia pic.twitter.com/ZG8MXCAhGk
— upuknews (@upuknews1) March 24, 2026
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