सब से माफी मांगते हुए…हरीश राणा की इच्छा मृत्यु की प्रक्रिया के दौरान का Video देख कांप जाएगी रूह

March 15, 2026 by No Comments

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Harish Rana Passive Euthanasia Video: सच कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है कि हम समझ ही नही पाते कि हमारे साथ क्या हो रहा है लेकिन उस कठोर विपरीत परिस्थिति में भी हम साहस के साथ खड़े रहते हैं और दर्द को हराने की हर कोशिश करते हैं लेकिन जब एक मां अपने ही जिगर के टुकड़े को इच्छा मृत्यु के समय उसे अपनी आंखों से हमेशा के लिए ओझल होते हुए देखे तो क्या आप सोच सकते हैं कि उसे कितना दर्द हो रहा होगा?

कुछ ऐसा ही दर्द आज हरीश राणा की मां ने भी सहा. आंसू से भरी बूढ़ी आंखें अपने ही बेटे को दुनिया से विदा कर रही थी. एक महिला ने सभी को माफ करते हुए और सभी से माफी मांगते हुए…कहते हुए वीडियो में दिख रही हैं. बता दें कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में रहने वाले हरीश राणा पिछले 13 साल से बिस्तर पर पड़े थे और उनका परिवार उनके ठीक होने की उम्मीद लगाए था लेकिन जब सारी उम्मीद टूट गई तो पिता ने सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई क्योंकि वह अब अपने बेटे का दर्द देख नहीं पा रहे थे और उनको चिंता थी कि उनके न रहने के बाद उनके बेटे का ख्याल कौन रखेगा?

क्योंकि 13 साल पहले जो बेटा हंसता-खेलता था वह अब एक जिंदा लाश बनकर रह गया था. सुप्रीम कोर्ट ने पिता और मरीज का दर्द समझा और भी हरीश को इच्छा मृत्यु देने का फैसला लिया. आज जब इच्छा मृत्यु का समय आयो तो हर कोई हरीश की अंतिम विदाई देखकर रो पड़ा.

सोशल मीडिया पर हरीश को इच्छा मृत्यु देने से पहले का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक महिला हरीश के सिर पर हाथ फैरते हुए कहती दिख रही है कि सभी को माफ करते हुए और सब से माफी मांगते हुए जाओ. इस दौरान हरीश भी कुछ कहने की कोशिश करता वीडियो में दिखाई दे रहा है लेकिन उसकी आखिरी कोशिश भी नाकाम होती है. क्योंकि शरीर ही ऐसा हो चुका है कि वह कुछ बोल ही नहीं सके.

एक हादसा और हरीश का बदल गया पूरा जीवन

मालूम हो कि हरिश एक होनहार इंजीनियरिंग छात्र था. वह पढ़ने में तेज था और सभी का प्यारा था. उसका व्यवहार इतनी अच्छा था कि हर कोई उससे प्यार कर बैठता था लेकिन फिर एक हादसा हुआ और वह इस कदर बिस्तर पर गया कि कभी नहीं उठ सका. वह न बोल सकता था, न चल सकता था और न ही अपने आसपास की दुनिया को समझ पाने में समर्थ था.

13 साल तक रहे मेडिकल सपोर्ट

इसको डॉक्टरों की भाषा में स्थायी वेजिटेटिव स्टेट कहते हैं. वह 13 साल तक मशीनों और मेडिकल सपोर्ट के सहारे जिंदा रहा. परिवार को आस लगी थी कि कभी वो ठीक हो जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इस केस की चर्चा पूरे देश में हो रही है और सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर ये कैसी बीमारी थी हरीश को जो दुनिया भर का मेडिकल फेल हो गया? सुप्रीम कोर्ट ने उनकी हालत को देखते हुए पैसिव यूथेनेशिया यानी जीवन रक्षक उपकरण हटाने की अनुमति हाल ही में दे थी.

जज की भी हो गई थीं आंखें नम

हरीश के पिता पिछले 3 साल से बेटे की इच्छा मृत्यु की मांग कर रहे थे. उनकी इस मांग को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दे दी थी. बता दें कि फैसला सुनाते वक्त जज की आंखें भी नम हो गई थी.

एक बयान में पिता ने कहा कि हमने 4588 दिन इस दर्द के साथ बिताए हैं, लेकिन अपने बेटे के जीवन रक्षक उपकरण हटाने का फैसला लेना उससे भी ज्यादा कठिन है.

की गई इच्छामृत्यु की प्रक्रिया

बता दें कि कोर्ट के निर्देश के बाद हरिश को दिल्ली के एम्स के पेलिएटिव केयर विभाग में भर्ती किया गया और वहां उनके जीवन के अंतिम चरण की देखभाल के लिए पूरा प्लान तैयार किया गया था. इसके बाद कोर्ट के आदेश पर धीरे-धीरे हरिश के जीवन रक्षक उपकरण हटाए गए. इस प्रक्रिया को बेहद संवेदनशील और मानवीय ढंग से पूरा किया गया ताकि मरीज की गरिमा बनी रहे.

मालूम हो कि कोर्ट ने पहले ही यह स्पष्ट किया था कि पीईजी ट्यूब के जरिए दिया जाने वाला पोषण भी मेडिकल ट्रीटमेंट की श्रेणी में आता है और इसे हटाना पैसिव यूथेनेशिया के दायरे में माना जाएगा.

बता दें कि भारत में पहली बार इच्छामृत्यु की प्रक्रिया की गई है. सूत्रों के अनुसार, एम्स के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल की पैलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती हरीश राणा के लाइफ सपोर्ट से जुड़े दो प्रमुख पाइप हटा दिए गए हैं. एम्स में चली यह प्रक्रिया देश में निष्क्रिय इच्छामृत्यु के मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में देखी जा रही है. मालूम हो कि इस केस में अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकीय टीम पूरी तरह से संवेदनशीलता और सावधानी के साथ कार्य कर रही है.

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