Harishyani Ekadashi-2022: रविवार को पड़ रही है श्री हरिशयनी एकादशी, एक दिन पहले से ही न खाएं ये सात चीजें, जानें क्यों कहा गया है इस एकादशी को हरिशयनी, कब करना होगा पारण
धर्म-अध्यात्म। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को हरिशयनी एकादशी कहा जाता है। इस बार यह एकादशी 10 जुलाई को पड़ रही है। इसको लेकर पण्डित शक्ति धर त्रिपाठी, शक्ति ज्योतिष केन्द्र लखनऊ, बताते हैं कि रविवार के दिन एकादशी तिथि का मान प्रातः 9:31 तक रहेगा। विशाखा नक्षत्र और शुभ योग होने से यह एकादशी और भी पुण्यदायनी हो जाती है। शास्त्रों के अनुसार श्री हरिशयनी एकादशी को विधि पूर्वक रहने वाले भक्त को भोग और मोक्ष दोनो की प्राप्ति होती है।

पण्डित शक्ति धर त्रिपाठी बताते हैं कि इस एकादशी को हरि शयनी एकादशी इसलिए कहा गया है क्योंकि इस दिन से श्री विष्णुभगवान चार महीने के लिए क्षीर सागर में शयन के लिए चले जाते हैं। इसीलिए इस एकादशी का नाम हरिशयनी पड़ा। इसी के साथ चार महीने के लिए विवाह आदि मंगल कार्य भी बंद हो जाते हैं। हरिशयनी एकादशी का पारण द्वादशी में ही करना चाहिए। इसलिए व्रती सोमवार को प्रातः 7:22 तक अवश्य ही पारण कर लें। उसके बाद त्रयोदशी लग जाएगी।
एक दिन पहले से ही करें ये कार्य
व्रत के एक दिन पहले से एक दिन बाद तक मूली, गाजर, आलू, मसूर, बैगन, चावल व सरसों का तेल आदि नहीं खाना चाहिए।
भूमि पर शयन सोना चाहिए।
तपस्वी की तरह व्यवहार व आचरण करना चाहिए।
श्री विष्णु सहस्त्र नाम का जप करना चाहिए। सम्भव हो तो पुरुष सूक्त का पाठ करें।
कमल पुष्प से भगवान की पूजा से हर कामना की पूर्ति होती है। इसलिए हो सके तो इसी पुष्प का इस्तेमाल करें।