Jivitputrika Vrat: जीवित्पुत्रिका व्रत का इस समय करें पारण…जानें क्या है नियम
Jivitputrika Vrat: संतान की दीर्घायु की कामना को लेकर आज (3 अक्टूबर) महिलाओं ने जीवित्पुत्रिका व्रत यानी जिउतिया व्रत रखा और घाट पर पहुंचकर पूजा-पाठ की. इस मौके पर मुख्य रूप से पूर्वांचल बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश सहित आसपास के कई इलाकों में इस पर्व को श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
मां और संतान की दीर्घायु और जीवन सुखद करने की कामना को लेकर ये निर्जला व्रत करती हैं. 24 घंटे तक बिना अन्न-जल के ये व्रत किया जाता है. जिउतिया व्रत का समापन अगले दिन नवमी तिथि में होगा. 4 अक्तूबर, रविवार को जितिया व्रत का पारण सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद पारण किया जा सकता है. अनुभवी व्रती बताती हैं कि अगर पारण के बाद नीबू, चीनी का घोल पिया जाए तो जो 24 घंटे तक निर्जला व्रत रखने का असर शरीर पर दिखाई नहीं देता.
जितिया व्रत पारण का नियम
अनुभवी व्रती बताती हैं कि पारण के दिन भोर में सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि के बाद तांबे के पात्र में जल लेकर उसमें लाल पुष्प और अक्षत डाल कर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर आराधना करें. इसके बाद पूजा स्थल पर धूप-दीप प्रज्जवलित करें. इसके बाद भगवान जीमूतवाहन के साथ चील और सियारिन का स्मरण करें और फिर उनको जल और प्रसाद अर्पित करें।
पूजा पूरी होने के बाद सबसे पहले प्रसाद परिवार के अन्य सदस्यों में वितरित करें और फिर भगवान को अर्पित किए गए जल और प्रसाद को स्वयं ग्रहण कर व्रत का पारण करें। कुछ लोग उड़द की खड़ी दाल 7 या 11 को पानी से निगलने के बाद व्रत का पारण करती हें. व्रत शुरू होने से पहले औऱ बाद तक घर के सभी लोग सात्विक भोजन करें. व्रत वाले दिन जमीन पर ही शयन करना चाहिए.
DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)
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