Kartik Month 2022: भगवान श्रीकृष्ण के सबसे प्रिय मास कार्तिक का हुआ शुभारम्भ, गुड़ का करें दान, गाजर, बैंगन सहित ये सात चीजें खानें से बचें, 15 प्वाइंट्स में समझें कार्तिक का महत्व, जानें तीन दिन में कैसे मिलेगा पूरे मास का फल

October 10, 2022 by No Comments

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कार्तिक मास स्पेशल। सनातन धर्म का सबसे पवित्र मास कार्तिक मास का शुभारम्भ हो चुका है। इस बार 10 अक्टूबर से 8 नवम्बर तक कार्तिक मास रहेगा। भारतीय ज्योतिष अनुसन्धान संस्थान के निदेशक आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि स्कंद पुराण में लिखा है ‘कार्तिक मास के समान कोई और मास नहीं हैं, सत्ययुग के समान कोई युग नहीं है, वेदों के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान दूसरा कोई तीर्थ नहीं है।

आचार्य विनोद कुमार मिश्र इस मास के महत्व का आगे वर्णन करते हुए बताते हैं कि महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 106 के अनुसार “कार्तिकं तु नरो मासं यः कुर्यादेकभोजनम्। शूरश्च बहुभार्यश्च कीर्तिमांश्चैव जायते।।” जो मनुष्य कार्तिक मास में एक समय भोजन करता है, वह शूरवीर, अनेक भार्याओं से संयुक्त और कीर्तिमान होता है।

देखें कार्तिक मास का क्या महत्व बताया गया है पुराणों में

महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 66 जो कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में अन्न का दान करता है, वह दुर्गम संकट से पार हो जाता है और मरकर अक्षय सुख का भागी होता है।
शिवपुराण के अनुसार कार्तिक में गुड़ का दान करने से मधुर भोजन की प्राप्ति होती है।
स्कंदपुराण वैष्णवखंड के अनुसार, ‘मासानां कार्तिकः श्रेष्ठो देवानां मधुसूदनः। तीर्थ नारायणाख्यं हि त्रितयं दुर्लभं कलौ।’
अर्थात मासों में कार्तिक, देवताओं में भगवान विष्णु और तीर्थों में नारायण तीर्थ बद्रिकाश्रम श्रेष्ठ है। ये तीनों कलियुग में अत्यंत दुर्लभ हैं।


स्कंदपुराण वैष्णवखंड के अनुसार, ‘न कार्तिसमो मासो न कृतेन समं युगम्‌। न वेदसदृशं शास्त्रं न तीर्थ गंगया समम्‌।’
अर्थात कार्तिक के समान दूसरा कोई मास नहीं, सतयुग के समान कोई युग नहीं, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं और गंगाजीके समान कोई तीर्थ नहीं है।
भगवान श्री कृष्ण को वनस्पतियों में तुलसी, पुण्य क्षेत्रों में द्वारिकापुरी, तिथियों में एकादशी और महीनों में कार्तिक विशेष प्रिय है- कृष्णप्रियो हि कार्तिक:, कार्तिक: कृष्णवल्लभ:। इसलिए कार्तिक मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायक माना गया है।

कार्तिक मास में वर्जित कार्य, इन चीजों को खाने से बचें
ब्रह्माजी ने नारदजी को कहा कि कार्तिक मास में बैंगन, करेला, चावल, दालें, गाजर, बैंगन, लौकी और बासी अन्न नहीं खाना चाहिए। अर्थात जिन फलों व सब्जियों में बहुत सारे बीज हों उनका भी त्याग करना चाहिए और संसार–व्यवहार न करें।

जानें क्या है कार्तिक मास में पुण्यदायी कार्य
प्रात: स्नान, दान, जप, व्रत, मौन, देव दर्शन, गुरु दर्शन, पूजन का अमिट पुण्य होता है। सवेरे तुलसी का दर्शन भी समस्त पापनाशक है। भूमि पर शयन, ब्रह्मचर्य का पालन, दीप दान तुलसी के पौधे लगाना हितकारी है।

भगवदगीता का पाठ करना तथा उसके अर्थ में अपने मन को लगाना चाहिए। ब्रह्माजी नारदजी को कहते हैं कि ऐसे व्यक्ति के पुण्यों का वर्णन महीनों तक भी नहीं किया जा सकता।

श्रीविष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करना भी विशेष लाभदायी है। ॐ नमो नारायणाय। इस महामंत्र का जो जितना अधिक जप करें, उसका उतना अधिक मंगल होता है। कम–से –कम 108 बार तो जप करना ही चाहिए।

प्रात: उठकर कर दर्शन करें। ‘पुरुषार्थ से लक्ष्मी, यश, सफलता तो मिलती है पर परम पुरुषार्थ मेरे नारायण की प्राप्ति में सहायक हो’ इस भावना से हाथ देखें तो कार्तिक मास में विशेष पुण्यदायी होता है।

सूर्योदय के पूर्व ही कर लें स्नान
आचार्य बताते हैं कि जो लोग कार्तिक मास में सूर्योदय के बाद स्नान करता है वह अपने पुण्य क्षय करता है और जो सूर्योदय के पहले स्नान करता है वह अपने रोग और पापों को नष्ट करने वाला हो जाता है। पूरे कार्तिक मास के स्नान से पापशमन होता है तथा प्रभुप्रीति और सुख-दुःख व अनुकूलता-प्रतिकूलता में सम रहने के सद्गुण विकसित होते हैं।

3 दिन में पूरे कार्तिक मास के पुण्य प्राप्त करें
कार्तिक मास के सभी दिन अगर प्रात: स्नान नहीं कर पाये तो कार्तिक मास के अंतिम 3 दिन त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा को ‘ॐकार’ का जप करते हुए प्रातः स्नान कर लेने से पूरे महीने भर के कार्तिक मास के स्नान के पुण्यों की प्राप्ति हो जाती है।

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)