Lunar Eclipse 2025 Today: ग्रहण के दौरान भूलकर भी न करे धोखाधड़ी और ठगाई का काम… गर्भवती महिलाएं बरतें ये सावधानी
Lunar Eclipse 2025 Today: साल 2025 का आखिरी चंद्र ग्रहण आज रात्रि 9:57 बजे से लग रहा है जो कि 1:27 बजे तक रहेगा। हालांकि ये एक खगोलीय घटना है और चंद्रग्रहण (Lunar Eclipse) तब लगता है, जब चन्द्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है लेकिन सनातन धर्म में ग्रहण के दौरान कुछ परेहज बताए हैं. ज्योतिष आचार्यों का मानना है कि इस दौरान भगवान को छूना नहीं चाहिए और भगवान की मूर्ति को छूना भी नहीं चाहिए. हालांकि इस दौरान मंत्रोच्चारण , जप आदि कर सकते हैं.
भारतीय ज्योतिष अनुसन्धान संस्थान,लखनऊ के निदेशक आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि वैज्ञानिकों की मानें तो चंद्रग्रहण तब लगता है जब सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा इस क्रम में लगभग एक सीधी रेखा में अवस्थित हों। इस ज्यामितीय प्रतिबन्ध के कारण चन्द्रग्रहण केवल पूर्णिमा को घटित हो सकता है. वह कहते हैं कि सनातन संस्कृति को मानने वाले इस दिन को लेकर खास परहेज करते हैं। इस दिन सूतक लगने के साथ ही मंदिरों के कपाट 9 घंटे पहले ही बंद कर दिए जाते हैं तो वहीं घरों में भी पूजा-पाठ निषेध हो जाता है.
ज्योतिषाचार्यों की मानें तो इस खगोलीय घटना के दौरान गर्भवती महिलाएं अपना ध्यान जरूर रखें और कुछ उपाय अवश्य करें। बावजूद इसके आचार्य सलाह देते हैं की पूजा के स्थल को पर्दे से बंद रखा जाए।
ये करें
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद, आचार्य कमलकांत कुलकर्णी बताते हैं कि गर्भवती महिलाएं ग्रहण के दौरान सुंदरकांड व देवी का पाठ व मंत्र का जाप कर सकती हैं लेकिन मूर्ति को स्पर्श न करें. तुलसी पत्र वाला जल ही पिएं। ग्रहण खत्म होने के बाद फिर से स्नान करें और सफेद वस्तु का दान करें। घर में देव स्थानों पर पर्दा कर दें।
गर्भवती महिलाएं हमेशा याद रखें ये सात बातें
नुकीली चीजों का प्रयोग न करें। जैसे सब्जी आदि न काटें या फिर सिलाई-कढ़ाई आदि का काम न करें। अर्थात चाकू या सुई आदि का इस्तेमाल न करें। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने पर उनके शिशु के अन्दर विकृति आने की सम्भावना रहती है। अर्थात शारीरिक दोष हो सकता है।
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान किसी भी कीमत पर घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। इस बात का ग्रहण के दौरान हमेशा ध्यान रखें, चाहे ग्रहण अपने देश में दिख रहा हो या नहीं।
सूर्य ग्रहण के कुप्रभाव से बचने के लिए गर्भवती महिलाओं को तुलसी दल को जीभ पर रखकर हनुमान चालीसा और दुर्गा स्तुति का पाठ कर सकती हैं।
तुसलीदल डालकर ही पानी पीना चाहिए। इस दिन के लिए गर्भवती महिलाओं को चाहिए कि जो पानी पिएं उस पूरे पानी में एक तुलसीदल डालकर रख दें और उसी का सेवन करें
ग्रहण समाप्त होने के बाद दान-पुण्य अवश्य करें। आचार्यों की मानें तो सफेद वस्तु का दान अवश्य करें।
सूर्य ग्रहण की समाप्ति के बाद गर्भवती महिलाएं स्नान जरूर करें और दूसरे धुले वस्त्र पहन लें।
इस दौरान गर्भवती महिलाओं को मानसिक जप करना चाहिए। अर्थात मन ही मन प्रभु का स्मरण करते रहें। इससे गर्भस्थ शिशु के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर अच्छा असर पड़ता है।
न खाएं दूसरे का अन्न
स्कन्द पुराण की मानें तो ग्रहण के समय दूसरे का अन्न खाने से 12 साल का किया हुआ जप, तप, दान सब खत्म हो जाता है.
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री कहते हैं कि ग्रहण के दौरान भगवान का चिंतन, जप, ध्यान करने पर उसका लाख गुना फल मिलता है.
ग्रहण के दौरान सभी काम छोड़ कर मौन रहें और जप करें.
ग्रहण लगने के पहले खान-पान ऐसा करिए कि आपको बाथरूम में ना जाना पड़े।
ग्रहण के दौरान धोखाधड़ी और ठगाई करने से सर्पयोनि मिलती है।
ग्रहण के दौरान जीव-जंतु या किसी की हत्या हो जाय तो नारकीय योनि में जाना पड़ता है।
ग्रहण के दौरान सोने से बचें. माना जाता है कि ऐसा करने से रोग बढ़ते हैं।
ग्रहण के दौरान पत्ते, तिनके, लकड़ी, फूल आदि नहीं तोड़ने चाहिए।
ग्रहण के दौरान अपने घर की चीज़ों में कुश, तुलसी के पत्ते अथवा तिल डाल देने चाहिए।
ग्रहण के दौरान दीक्षा अथवा दीक्षा लिए हुए मंत्र का जप करने से सिद्धि हो जाती है।
ग्रहण के दौरान भोजन व मालिश करने वाले को कुष्ट रोग हो जाता है।
ग्रहण के दौरान रुद्राक्ष की माला धारण करने से पाप नाश हो जाते हैं।
DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)
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