चिंताजनक: क्वालिटी टेस्ट में फेल… कैल्शियम-विटामिन डी3 समेत 49 दवाएं; पैरासिटामोल भी शामिल

October 26, 2024 by No Comments

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Medicine: केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने दवाओं की क्वालिटी टेस्ट रिपोर्ट को जारी कर दिया है. क्वालिटी टेस्ट में फेल दवाओं की ये रिपोर्ट सितंबर माह की है. रिपोर्ट के मुताबिक विटामिन डी3 और कैल्शियम सहित कफ सिरप, मल्टीविटामिन और एंटी एलर्जी दवाओं के साथ ही पैरासिटामोल भी शामिल है. पैरासिटामोल लगातार दूसरे महीने भी क्वालिटी टेस्ट में फेल पाई गई है. हैरान करने वाली बात तो ये है कि इस लिस्ट में वो दवा भी क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गई है, जिसे आमतौर पर डाक्टर्स मरीजों को देने की सलाह देते हैं. तो वहीं स्टैंडर्ड क्वालिटी के मुताबिक दवा न होने से काफी लोग खराब दवाइयों को इस्तेमाल कर लेते हैं.

जानें क्या होता है दवा के फेल होने का अर्थ?

इस सम्बंध में DCGI राजीव सिंह रघुवंशी का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस बयान में उन्होंने कहा है कि टेस्टिंग पैरामीटर्स में अगर कोई दवा फेल हो जाती है तो उसे स्टैंडर्ड क्वालिटी का नहीं कहा जाता. इससे ये स्पष्ट हो जाता है कि जिस कंपनी ने यह दवाई बनाई है, उस कंपनी की उस बैच की दवा स्टैंडर्ड के मुताबिक नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि क्वालिटी टेस्ट में जो भी दवाएं फेल हुई हैं, उन दवाओं के सैंपल मार्केट में मौजूद थे और इन सैंपल्स को लेकर ही टेस्ट किया गया है. इसी के साथ ही उन्होंने कार्रवाई को लेकर कहा कि जो भी दवाएं स्टैंडर्ड क्वालिटी के मुताबिक नहीं होती हैं, उनकी कंपनियों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया की जाती है.

पिछले महीने भी टेस्ट में दवाएं हुई थीं फेल

अगर चिकित्सकों की मानें तो लगातार खराब क्वालिटी की दवा खाने से सेहत पर बुरा असर पड़ता है. इससे मरीजों की परेशानी बढ़ने का पूरा चांस रहता है. अगस्त की रिपोर्ट में पैरासिटामोल के साथ ही 53 दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल हुई थीं. इस सम्बंध में डॉ. स्वाति माहेश्वरी ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि ऐसी दवाओं को बनाने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए.

जानें किन दवाओं के सैंपल हुए फेल

बता दें कि केंद्रीय दवा मानक निरंतरण संगठन हर महीने बाजार से दवाओं के सैंपल उठाकर अलग-अलग मानकों पर इसकी जांच करता है. सितम्बर महीने में जो दवाएं टेस्ट लिस्ट में फेल हुई हैं, उनकी लिस्टा जारी की गई है. इस लिस्ट में निमेसुलाइड+पैरासिटामोल, ओमेरिन डी कैप्सूल, विटामिन डी 3, कैल्शियम 500, पैरासिटामोल पेडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन, पैंटोप्रेज़ोल, सेट्रीजीन सिरप, एसिक्लोफेनाक सहित कुल 49 दवाएं शामिल हैं. मालूम हो कि लोग इन दावओं का इस्तेमाल अक्सर गैस्ट्रिक, बुखार, खांसी और दर्द के लिए करते हैं.

बड़ी कंपनियों के नाम की फेक दवाएं बाजार में मिलीं

मालूम हो कि बता दें कि केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन हर महीने बाजार से अलग-अलग दवाइयों के सैंपल टेस्ट करता है, जिसके बाद हर महीने क्वालिटी टेस्ट की रिपोर्ट जारी की जाती है. इसी क्रम में जो सितम्बर की रिपोर्ट सामने आई है, वो चिंताजनक है. तो वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CDSCO की रिपोर्ट में चार ऐसी दवाइयां भी शामिल हैं, जिन्हें किसी बड़ी कंपनी के नाम से दूसरी कंपनी ने बनाकर बाजार में उतार दिया है. इन दवाओं में कैल्शियम 500, ड्यूटैस्टराइड/टैमसुलोसिन ,पैंटोप्राज़ोल, विटामिन डी 3 और नैंड्रोलोन शामिल हैं. इस तरह से देखा जाए तो कंपनियां ग्राहकों से बड़ा पैसा वसूल करने के साथ ही उनकी सेहत के साथ भी खिलवाड़ कर रही हैं. इस तरह से कह सकते हैं कि लोग इन दवाओं पर खर्च कर जो आर्थिक नुकसान उठा रहे हैं वो अलग और जो उनकी सेहत बिगड़ रही है वो अलग. ऐसे में सवाल ये उठता है कि अब लोग सेहत से जुड़ी किसी भी तरह की परेशानी होने पर कौन सी दवा खाएं?

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