Pitru Paksha-2022: 10 सितम्बर से शुरू हो रहे हैं पितृपक्ष, जानें क्या हैं श्राद्ध पक्ष पालन के नियम, देखें मंत्र, महिलाएं भी कर सकती हैं महालय

September 9, 2022 by No Comments

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महालय स्पेशल। सनातन धर्मियो के पितरों को याद करने का पखवारा भादों की पूर्णिमा 10 सितम्बर शनिवार से आरम्भ होगा। प्रति वर्ष की भाँति 16 दिनों का यह सामूहिक श्राद्ध अश्विन मास की अमावस्या अर्थात 25 सितम्बर, दिन रविवार को समाप्त हो जाएगा।

शक्ति ज्योतिष केन्द्र लखनऊ के पंडित शक्ति धर त्रिपाठी बताते हैं कि श्राद्ध के दिनों में हमारे पितर किसी न किसी रूप में हमारे घर आते हैं। हम से श्राद्ध , तर्पण, आदर – सत्कार की आशा करते हैं और बदले में आशीर्वाद देकर चले जाते हैं। जिनके पूर्वजों की मृत्यु उक्त 16 दिनों में से जिस किसी तिथि को हुयी हो उस दिन अपने पितर के नाम पर तर्पण, दान, ब्राह्मण भोजन आदि अवश्य कराना चाहिये। गाय , कुत्ते एवं कौवे को भी भोजन देने का शास्त्रीय विधान है। शास्त्रों में बताया गया है कि अगर पूर्वज की मृत्यु की तिथि नहीं मालूम है तो अमावस्या को श्राद्ध किया जा सकता है।

वहीं आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से अमावस्या तक पितृपक्ष रहता है, जिसे महालय भी कहते हैं। इस दौरान श्राद्ध करने वालों को कुछ नियमों का पालन करना अति आवश्य़क है। मान्यता है कि ये दिन हमारे पितरों अर्थात हमारे पूर्वजों के लिए होता है, जिनकी वजह से आज हम इस दुनिया में हैं। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बनती है कि इन 15 दिन वो सभी कार्य करें, जिससे हमारे पितर प्रसन्न होकर हमें आशीर्वाद दें। मान्यता है कि इन 15 दिनों तक पितर धरती पर आते हैं और अपनों द्वारा दिए गए सम्मान को ग्रहण करते हैं

श्राद्ध पक्ष में पालन करने वाले नियम इस प्रकार हैं

श्राद्ध के दिन भगवदगीता के सातवें अध्याय का माहात्म पढ़कर फिर पूरे अध्याय का पाठ करना चाहिए एवं उसका फल मृतक आत्मा को अर्पण करना चाहिए।

श्राद्ध के आरम्भ और अंत में तीन बार निम्न मंत्र का जप करें और मंत्र को ध्यान से पढ़ें।
देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव भवन्त्युत।। अर्थात (समस्त देवताओं, पितरों, महायोगियों, स्वधा एवं स्वाहा सबको हम नमस्कार करते हैं। ये सब शाश्वत फल प्रदान करने वाले हैं।)

“श्राद्ध में एक विशेष मंत्र उच्चारण करने से, पितरों को संतुष्टि होती है और संतुष्ट पितर आपके कुल खानदान को आशीर्वाद देते हैं।
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधादेव्यै स्वाहा।

जिसका कोई पुत्र न हो, उसका श्राद्ध उसके दौहिक (पुत्री के पुत्र) कर सकते हैं। कोई भी न हो तो पत्नी ही अपने पति का बिना मंत्रोच्चारण के श्राद्ध कर सकती है।

पूजा के समय गंध रहित धूप प्रयोग करें और बिल्व फल प्रयोग न करें और केवल घी का धुआं भी न करें।

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