UPI पेमेंट चार्ज को लेकर आई बड़ी खबर…सरकार ने MDR पर किया ये फैसला

September 15, 2026 by No Comments

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UPI News: वर्तमान समय में UPI केवल पेमेंट का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट से लेकर सब्जी खरीदने व ऑनलाइन शॉपिंग, रेस्टोरेंट-होटल का बिल चुकाने और किराया भेजने तक में लोग इसी के जरिए मनी ट्रांसफर कर रहे हैं. यानी कुछ ही सेकंड में फोनपे, गूगल-पे, पेटीएम या किसी अन्य UPI ऐप के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है.

इसकी आदत लोगों में इतनी पड़ गई है कि लोग पॉकेट में कैश तक नहीं रखते और ऑनलाइन ही पे करते हैं. सोमवार को सरकार ने एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया है. इसी के बाद से लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं.

मालूम हो कि वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट के तहत नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इस नियम की अगर मानें तो अब बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (जैसे PhonePe, Google Pay) ₹2,000 तक के यूपीआई और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर कोई भी चार्ज नहीं लगा सकते हैं. मतलब अगर हम ₹2,000 तक के पेमेंट किसी को करते हैं तो वो पूरी तरह से कानूनी रूप से ‘फ्री’ रहेंगे.

इसी के बाद से लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं, मसलन क्या ₹2,000 से अधिक का UPI ट्रांसफर करने पर चार्ज लगेगा? इस पर एक्पर्ट की राय सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसमें बताया गया है कि ₹2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर सरकार ने कोई नया टैक्स या डायरेक्ट कंज्यूमर चार्ज को नहीं लगाया है. यानी अगर कोई ₹2,000 से अधिक का UPI पेमेंट करता है, तो कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लिया जाएगा लेकिन ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर आने वाले समय यानी भविष्य में क्या व्यवस्था होगी, इस पर अब सभी की नजर है.

क्या छोटे मूल्य वाले ट्रांसैक्शन पर पड़ेगा कोई चार्ज?

जानकारों के मुताबिक, इस नए नियम के तहत छोटे मूल्य वाले ट्रांजैक्शन (जैसे ₹280 का लंच, ₹10 की चाय या ₹1,500 की खरीदारी) यानी ₹2,000 से कम का ट्रांजैक्शन पूरी तरह से सुरक्षित दायरे में आते हैं. माना जा रहा है कि इन पर भविष्य में भी कोई चार्ज नहीं लगाया जा सकता.

क्या घर का रेंट देने पर कटेंगे पैसे?

नहीं यानी पर्सन-टू-पर्सन (P2P) मतलब एक साधारण बैंक खाते से दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में किए जाने वाले पैसे के ट्रांसफर को हमेशा की तरह पूरी तरह से फ्री रखा गया है. इस नियम को प्रमुख रूप से व्यावसायिक यानी बिजनेस लेन-देन से जोड़ा गया है. सामान्य घरेलू पैसों के लेनदेन में कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

क्या है MDR? क्या ग्राहक होगा प्रभावित?

मालूम हो कि एमडीआर (MDR) एक ऐसी प्रोसेसिंग फीस है जिसको डिजिटल पेमेंट कंपनियां या बैंक किसी व्यापारी से पेमेंट स्वीकार करने के बदले वसूलती हैं. फिलहाल सरकार ने आम जनमानस पर तो कोई सीधा शुल्क नहीं लगाया है लेकिन अगर आने वाले समय में यानी भविष्य में बड़े पेमेंट्स पर दुकानदारों से MDR लिया जाता है, तो फिर व्यापारी उस लागत की भरपाई करने के लिए ग्राहकों की जेब से ही एक्स्ट्रा चार्ज की वसूली कर सकते हैं. जैसा कि कुछ स्थानों पर क्रेडिट कार्ड पेमेंट पर देखने को मिलता है.

MDR पर सरकार का फैसला

MDR को लेकर सरकार ने फैसला किया है कि ₹2,000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लगेगा तो वहीं ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर अधिकतम ₹300 MDR लगेगा, ₹2,000 तक के UPI भुगतान पर कोई MDR नहीं लगाया जाएगा. नया MDR 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा.

सोशल मीडिया पर इस सम्बंध में लगातार सरकार को घेरा जा रहा है. सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि सरकार एक तरफ तो ये बता रही है कि सामान्य लेन-देन में एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेंगे लेकिन जब कोई चीज दुकान से खरीदेंगे और दुकानदार को जब चार्ज देना होगा तो वो इसकी भरपाई ग्राहक से ही तो करेगा. मतलब कुल मिलाकर सामान्य लेने-देन वाला ही इसका शिकार होगा लेकिन सरकार ऐसे दिखा रही है मानो सामान्य लेन-देन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

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