Purnima Vrat: मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत पर इस तरह करें भगवान नारायण की पूजा, चंद्रमा को अर्घ्य देते हुए कहें ये बात, पूरी होगी मुराद, जानें व्रत-पूजन की पूरी विधि

December 4, 2022 by No Comments

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पूर्णिमा विशेष। मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत के दिन भगवान नारायण की पूजा की जाती है। आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि सबसे पहले नियमपूर्वक पवित्र होकर स्नान करें और सफेद कपड़े पहनें। फिर आचमन करें।

इसके बाद जो लोग व्रत रख रहे हैं, वो “ओम नमो नारायण “ कहकर आह्वान करें। इसके बाद आसन, गंध, फूल आदि भगवान को अर्पण करें। भगवान के सामने चौकोर बेदी बनाएं, जिसकी लम्बाई और चौड़ाई एक-एक हाथ हो। हवन करने के लिए अग्नि स्थापित करें और उसमें तेल, घी, बूरा आदि की आहूति दें। हवन की समाप्ति के बाद भगवान का पूजन करें और इसी के साथ अपना व्रत भगवान नारायण को अर्पित करें और कहें-

पौर्णमास्यं निराहार: स्थिता देव तवाज्ञया।
मोक्ष्यादि पुण्डरीकाक्ष परोsह्वि शरणं भव।।

(अर्थात हे देव पुण्डरीकाक्ष! मैं पूर्णिमा को निराहार व्रत रखकर दूसरे दिन आपकी आज्ञा से भोजन करुंगी/करुंगी, आप मुझे अपनी शरण में लें।)

इस प्रकार भगवान को अपना व्रत समर्पित करके शाम को चंद्रमा निकलने पर दोनों घुटने पृथ्वी पर टेक सफेद फूल, अक्षत, चंदन, जल सहित अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय चंद्रमा से कहें-
“हे भगवान! रोहिणीपते! आपका जन्म अत्रि कुल में हुआ और आप क्षीर सागर में प्रकट हुए। मेरे दिए हुए अर्घ्य को आप स्वीकार करें।”

ये कहने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर उनकी ओर मुंह करके हाथ जोड़कर प्रार्थना करें और कहें-
“हे भगवान! आप श्वेत किरणों से सुशोभित होते हैं। आपको नमस्कार है। आप द्विजों के राजा हैं। आपको नमस्कार है। आप रोहिणी के पति हैं। आपको नमस्कार है। आप लक्ष्मी के भाई हैं, आपको नमस्कार है।”

इस तरह के पूजा करने के बाद रात में भगवान नारायण की मूर्ति के पास ही सोएं। दूसरे दिन सुबह ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा देकर उन्हें विदा करें।