Purushottam Maas: पुरुषोत्तम मास के दौरान भूल कर भी न करें ये कार्य…घिर जाएंगे समस्याओं में

Share News

Purushottam Maas: सनातन धर्म का सबसे पवित्र मास पुरुषोत्तम मास 17 जून से शुरू हो चुका है. इस दौरान किसी भी तरह का मांगलिक कार्य नहीं किया जाता लेकिन धार्मिक कार्य करने से पूरे साल लाभ ही लाभ की प्राप्ति होती है. इसलिए इस मास का महत्व बढ़ जाता है.

आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री कहते हैं कि सनातन यानी हिन्दू पंचांग मुख्य रूप से चंद्रमा की गति पर आधारित होता है. यानी एक चंद्रमास अमावस्या से अगली अमावस्या तक होता है. इसकी अवधि करीब 29.5 दिन होती है. इस तरह से 12 चंद्रमास मिलकर 354 दिन बनाते हैं, लेकिन ये तो सभी जानते हैं कि पृथ्वी को सूर्य का चक्कर पूरा करने में करीब 365 दिन लगते हैं. मतलब साफ है कि सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष में लगभग 11 दिन का अंतर बन जाता है और फिर यही आगे चलकर एक बड़े दिन में बदल जाता है.

माना जाता है कि अगर इस अंतर को सही न किया जाए तो धीरे-धीरे ऋतु और त्योहारों के मास में परिवर्तन होने लगेगा. फिर कुछ वर्षों बाद क्या होगा? होली जो अभी मार्च के महीने में पड़ती है भीषण गर्मी में पड़ने लगेगी और फिर सर्दी वाली दिवाली वर्षा ऋतु में पड़ने लगेगी और फिर धीरे-धीरे इसमें भी परिवर्तन देखने को मिलेगा.

इसीलिए भारतीय पंचांग इस पूरी प्रक्रिया को संतुलित रखता है. इसलिए इस पूरे संतुलन को बनाए रखने के लिए भारतीय ज्योतिष में हर तीन साल पर एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है. यानी एक महीना दो बार पड़ता है, जैसे इस बार जेठ का महीना दो बार पड़ा है तो पिछली बार यानी तीन साल पहले सावन का महीना दो बार पड़ा था.

इस बार पुरुषोत्तम मासल 17 मई से शुरू हुआ है जो कि 15 जून को समाप्त होगा. यह पवित्र महीना भगवान विष्णु का अतिप्रिय माना गया है. इसलिए मान्यता है कि इस दौरान किया गया जप-तप, दान और पूजा का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता. इसे अधिक मास और मलमास भी कहा जाता है.

करें ये कार्य

आचार्य कमलकांत कुलकर्णी बताते हैं कि पुरुषोत्तम मास में भागवत कथा, सत्यनारायण भगवान की कथा, विष्णु पूजन, पीपल वृक्ष को जल देना, दीप पूजन, तुलसी पूजन, पवित्र नदियों में स्नान, तीर्थ भ्रमण, गौ सेवा, बुआ, भतीजी, भांजी के साथ ही ब्राह्मण को दान, केले के पत्र पर भोजन, जमीन पर शयन करना, दीपदान कर पुण्य प्राप्त किया जा सकता है.

ये कार्य न करें

विशेष उत्सव का आयोजन, गृह आरम्भ, गृह प्रवेश, विवाद, उपनयन संस्कार, कर्ण छेदन, नवीन फर्नीचर, बिस्तर, आभूषण निर्माण, देव प्रतिमा क्रय, प्राण प्रतिष्ठा, प्रापर्टी आदि का कार्य भूल कर भी न करें. इससे नकारात्मक ऊर्जा का घर में वास हो जाता है, जिससे साल भर कर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

ये भी पढ़ें-Hanuman Jayanti: साल में दो बार क्यों मनाई जाती है हनुमान जयंती और क्या है वजह? यहां जानें