Hanuman Jayanti: साल में दो बार क्यों मनाई जाती है हनुमान जयंती और क्या है वजह? यहां जानें 

April 1, 2026 by No Comments

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Hanuman Jayanti: सनातन शास्त्रों के मुताबिक साल में दो बार हनुमान जयंती मनाने की परम्परा चली आ रही है. कभी-कभी लोग इस बात को लेकर बड़े कन्फ्यूज हो जाते हैं कि कौन सी हनुमान जयंती पर हनुमान जी का जन्म हुआ था. हालांकि कुछ लोग दीपावली के पहले पड़ने वाली हनुमान जयंती को ही हनुमान जी का जन्मोत्सव मान लेते हैं लेकिन ऐसा नहीं. आज इस लेख के जरिए सभी का कन्फ्यूजन हम दूर कर रहे हैं.

आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि हनुमान जयंती साल में दो बार मनाई जाती है लेकिन दोनों की वजह अलग है. उत्तर भारत में चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जी का जन्म माता अंजनि के गर्भ से हुआ था. इसलिए इस दिन जन्मोत्सव मनाया जाता है. इसलिए इस तिथि पर पूरे उत्तर भारत में धूमधान से राम भक्त हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है.

तो वहीं दक्षिण भारत में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हनुमान जन्मोत्सव मनाने की परम्परा है. मान्यता है कि इस दिन भगवान हनुमान को देवी सीता ने अमर होने का वरदान दिया था. इसलिए दक्षिण भारत में इस दिन को हनुमान जयंती के तौर पर मनाया जाता है तो वहीं उत्तर भारत में इस दिन को हनुमान जी की विजय के तौर पर मनाते हैं.

हनुमान जी अत्यंत बलशाली, परम पराक्रमी, ज्ञानी, भगवान राम के अनन्य भक्त का जीवन भारतीय जनता के लिए हमेशा से ही प्रेरणादायक रहा है. भारतीय मल्ल विद्या के यही अराध्य देव हैं. इसीलिए आपने देखा होगा कि अखाड़ों में हनुमान जी की ही प्रतिमाएं लगी होती हैं और इनकी ही पूजा की जाती है. माना जाता है कि जहां भी हनुमान जी होते हैं वहां पर नकारात्मक शक्तियां नहीं आ पाती. इसीलिए आचार्य उन  लोगों से हमेशा हनुमान चालीसा का पाठ करने की सलाह देते हैं जो जीवन में संकट के दौर से गुजर रहे होते हैं.

महावीर चक्र

वीरता में हनुमान जी का किसी से कोई मुकाबला नहीं. भगवान शिव के अवतारी कहे जाने वाले राम भक्त हनुमान जी के नाम पर ही भारत सरकार वीरता का सर्वोच्च पुरस्कार महावीर चक्र नामक स्वर्ण पदक भी देती है. माना जाता है कि जो सच्चे ह्रदय से हनुमान जी की भक्ति करता है, उसे तुलसीदास जी की तरह राम दर्शन में देर नहीं लगती.

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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