Raksha Bandhan-2023: जानें कब मनेगा रक्षाबंधन 30 या 31 अगस्त को ? दिन भर रहेगा भद्रा का साया, देखें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, जानें क्या होती है भद्रा

August 21, 2023 by No Comments

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Raksha Bandhan 2023: इस बार अधिकमास (मलमास) होने के कारण रक्षाबंधन सहित सावन के सभी त्योहार देर से होंगे. हिंदू पंचांग के अनुसार हर 3 वर्ष बाद अधिकमास जिसे मलमास भी कहा जाता है. इसकी वजह से एक महीने का अतिरिक्त समय बढ़ जाता है. इस बार 16 अगस्त से अधिकमास खत्म हो गया है और इसी के बाद सावन के त्योहार भी शुरू हो गए हैं. इस बार रक्षाबंधन का पर्व 30 अगस्त को ही मनाया जाएगा. पर्व को लेकर व्याप्त भ्रम को काशी के विद्वानों ने दूर कर दिया है। उन्होंने बताया कि 30 अगस्त को भद्रारहित काल में रक्षाबंधन किया जा सकता है तो वहीं लोगों में 30 और 31 को लेकर भ्रम व्याप्त है. बता दें कि पिछले साल भी रक्षाबंधन को लेकर इसी तरह का भ्रम रहा और फिर लोगों ने दो दिन भाई-बहन के पवित्र प्रेम के प्रतीक त्योहार रक्षाबंधन को दो दिन मनाया था.

30 अगस्त को ही मनाएं रक्षाबंधन
काशी विद्वत परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष व ज्योतिषाचार्य प्रोफेसर रामचंद्र पांडेय ने धर्म सिंधु व निर्णय सिंधु ग्रंथों के आधार पर बताया कि इस बार पूर्णिमा का मान दो दिन प्राप्त हो रहा है। प्रथम दिवस सूर्योदय के एक घटी बाद से पूर्णिमा प्रारंभ होकर दूसरे दिन छह घटी से कम प्राप्त हो रही है। ऐसे में पूर्व दिवस में भद्रा से रहित काल में रक्षाबंधन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि 31 अगस्त को पूर्णिमा छह घटी से कम प्राप्त हो रही है। 30 अगस्त को रात नौ बजे तक भद्रा है। इसलिए 30 अगस्त को रात्रि में भद्रा के बाद रक्षाबंधन करना शास्त्र सम्मत होगा। इसी के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर नागेंद्र पांडेय ने भी विभिन्न पंचांगों में प्रदत्त पूर्णिमा के मान, धर्मशास्त्रों के वचनों की समीक्षा करते हुए 30 अगस्त को ही पूर्णिमा मनाने का समर्थन किया है. इसी के साथ कहा है कि, 31 अगस्त को प्रात: काल तक ही पूर्णिमा तिथि मिल रही है, लेकिन 6 घटी की पूर्णिमा नहीं मिल रही है. इसलिए ज्योतिषियों की राय में रक्षाबंधन 30 को मनाना ही श्रेष्ठ होगा। 31 अगस्त को 6 घटी की पूर्णिमा न मिलने के कारण पूर्णिमा व श्रावणी उपाकर्म के लिए शुभ फलदाई नहीं होगा।

‌इतने बजे से लग रही है भद्रा
भद्रा 30 अगस्त को सुबह 10:12 से लेकर रात्रि 8:58 तक है। हालांकि कुछ आचार्यों का मानना है कि भद्रा का मान केवल उनको ही होता है, जो भाई-बहन पहली बार राखी का पर्व मना रहे होते हैं. यानी जो पहले रक्षाबंधन का पर्व मना चुके हैं वह भद्रा के दौरान भी राखी बंधवा सकते हैं. हालांकि काशी के विद्वानों का कहना है कि ऐसा नहीं होता है. काशी के विद्वान कहते हैं कि भद्रा की कोई काट नहीं है. इस दौरान राखी बांधना अशुभ माना गया है.

रक्षाबंधन 2023 शुभ तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि 30 अगस्त 2023 को सुबह 11 बजे से शुरू हो जाएगी, वहीं श्रावण पूर्णिमा तिथि का समापन 31 अगस्त को सुबह 07 बजकर 07 मिनट पर होगा। हालांकि आम जनमानस में उदया तिथि में पूर्णिमा को लेते हुए रक्षाबंधन को 31 अगस्त को ही मनाने की चर्चा तेज है. इस तरह से देखा जाए तो आम जनमानस में लोग दो दिन रक्षाबंधन मनाने की तैयारी कर रहे हैं. तो वहीं आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री का कहना है कि, 30 अगस्त को सुबह भद्रा के लगने से पहले राखी बांधी जा सकती है और 31 अगस्त को सुबह 07 बजकर 07 मिनट से पहले राखी बांध सकते हैं।

जानें भद्रा क्या होती है?
धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों के मुताबिक, भद्रा शनिदेव की बहन और भगवान सूर्य व माता छाया की संतान हैं। पौराणिक कथाओं का अगर मानें तो भद्रा का जन्म दैत्यों के विनाश के लिए हुआ था। जब भद्रा का जन्म हुआ तो वह जन्म लेने के फौरन बाद ही पूरे सृष्टि को अपना निवाला बनाने लगी थीं। इस तरह से भद्रा के कारण जहां भी शुभ और मांगलिक कार्य, यज्ञ और अनुष्ठान होते वहां विध्न आने लगता है। इस कारण से जब भद्रा लगती है तब किसी भी तरह का शुभ कार्य नहीं किया जाता है। भद्रा को 11कारणों में 7वें करण यानी विष्टि करण में स्थान प्राप्त है।

वहीं वैदिक पंचांग की गणना की अगर मानें तो भद्रा का वास तीन लोकों में होता है। अर्थात भद्रा स्वर्ग, पाताल और पृथ्वी लोक में वास करती हैं। वैदिक पंचांग के मुताबिक जब चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ और मीन राशि में मौजूद होते हैं। तब भद्रा का वास पृथ्वी लोक पर होता है। पृथ्वीलोक में भद्रा का वास होने पर भद्रा का मुख सामने की तरफ होता है। ऐसे में इस दौरान किसी भी तरह का शुभ और मांगलिक कार्य को करना निषेध माना गया है और ये भी माना गया है कि इस दौरान किया गया कोई भी शुभकार्य फलदाई नहीं होता है और न ही सफल होता है. पौराणिक कथा में दी गई मान्यता के मुताबिक रावण की बहन ने भद्राकाल में ही रावण को राखी बांधी थी जिसके कारण रावण का भगवान राम के हाथों विनाश हुआ था.

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)