Sakat Chauth: संतान में विद्या और बुद्धि के साथ बढ़ेगा तेज… सकट चौथ पर करें ये सरल उपाय
Sakat Chauth: माघ कृष्ण चतुर्थी को सकट चौथ मनाया जाता है। मान्यता है कि सकट चौथ पर भगवान गणेश जी की पूजा करने और व्रत रखने से संतान को लंबी आयु प्राप्त होती है। साथ ही संतान पर आने वाली किसी भी तरह की बाधा भी कट जाती है और शिक्षा, सेहत व करियर आदि की समस्याएं भी इस व्रत से दूर हो जाती हैं। यह पर्व माताएं अपनी परम्परा के साथ भी मना सकती हैं।
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि यह संतान पर्व है। इसी वजह से इस पर्व का हिंदु धर्म में विशेष महत्व है। माताएं अपनी संतान की दीर्घ आयु और सुख-समृद्धि के लिए इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं। चूंकि चौथ, अर्थात चतुर्थी तिथि भगवान गणेश जी की मानी गई है और वह विद्या, बुद्धि के देवता हैं। इसलिए सकट चौथ पर माताओं को गणेश जी को काले व सफेद तिल को मिलाकर लड्डू बनाकर भोग लगाना चाहिए। इसी के साथ गणेश जी के 12 नामों का जाप भी करें।
चढ़ाएं काले और सफेद तिल का लड्डू
ज्योतिषाचार्य संतोष पाधा बताते हैं कि इस पर्व को सकट चौथ, तिलकुटा चौथ व संकष्टी चतुर्थी आदि के नामों से भी जाना जाता है। यह दिन विशेष तौर पर गणेश जी का दिन होता है। इसलिए इस दिन व्रती अगर गणेश जी को काले व सफेद तिल को मिलाकर लड्डू चढ़ाएं तो उनकी संतान में विद्या-बुद्धि के साथ ही तेज भी बढ़ेगा। इसी के साथ गणेश जी के 12 नामों का जाप भी करें। वहीं आचार्य पंडित रवि शास्त्री बताते हैं कि सकट चौथ पर भगवान गणेश जी की विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए। मान्यता है कि सकट चौथ पर भगवान गणेश जी की पूजा करने और व्रत रखने से संतान को लंबी आयु प्राप्त होती है। साथ ही संतान पर आने वाली किसी भी तरह की बाधा भी कट जाती है। संतान की शिक्षा, सेहत और करियर आदि की समस्याएं भी इस व्रत को करने से दूर हो जाती हैं। यह पर्व माताएं अपनी परम्परा के साथ मना सकती हैं।
बुध ग्रह की अशुभता भी होती है कम
गणेश जी बुद्धि के दाता तो हैं ही साथ ही इनकी पूजा करने से बुध ग्रह की अशुभता भी दूर होती है। केतु के बुरे प्रभाव को भी कम करने में यह व्रत व पूजा सहायक है। इस दिन तिल और गुड़ से बनी चीजों का सेवन करना चाहिए। इसीलिए इसे तिलकुटा चौथ भी कहते हैं।
ये मंत्र धीरे-धीरे दोहराएं
सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णक:। लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायक:।।
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजानन:। द्वादशैतानि नामानि य: पठेच्छणुयादपि।।
इन 12 नामों का जरूर करें जाप
सुमुख (सुंदर मुख वाले)
लम्बोदर (लम्बे पेट वाले)
विकट (विपत्ति का नाश करने वाले)
विनायक (न्याय करने वाले)
धूम्रकेतु (धुएं के रंग वाली पताका वाले)
गणाध्यक्ष (गुणों के अध्यक्ष)
भालचन्द्र (मस्तक में चन्द्रमा धारण करने वाले)
गजानन (हाथी के समान मुख वाले)
विघ्रनाशन (विघ्नों को हरने वाले)
एकदन्त (एक दांत वाले)
कपिल (कपिल वर्ण के)
गजकर्ण (हाथी के कान वाले)
DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)
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