“संचार साथी ऐप” पर मचा घमासान…विपक्ष ने बताया जासूसी; विवाद बढ़ने पर सरकार ने लिया यू-टर्न तोड़ा भ्रम-Video

December 2, 2025 by No Comments

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Sanchar Saathi App: संचार साथी एप पर पूरे देश में जमकर सियासत हो रही है. विपक्ष इसे सरकार द्वारा जासूसी कराने का जरिया बता रहा है. दरअसल दूरसंचार विभाग ने इस एप को हर स्मार्टफोन में अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉलेशन जरूरी कर दिया है. तो वहीं जो फोन पहले से बाजार में हैं या लोगों के पास हैं उन्हें अगले सॉफ्टवेयर अपडेट के साथ इस ऐ को इंस्टॉल करने के लिए भी अनिवार्य कर दिया गया है. दरअसल साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों को देखते हुए 2023 में यह वेब पोर्टल के रूप में शुरू किया गया था. तो वहीं 17 जनवरी 2025 को इसका मोबाइल एप लॉन्च किया गया.

इसी के साथ ही कंपनियों को इसे लागू करने के लिए 90 दिन का वक्त दिया गया है. इसको लेकर 28 नवंबर को दूरसंचार विभाग ने निर्देश जारी कर दिया था. इसी के बाद से पर सियासत शुरू हो गई है. विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि इस ऐ का इस्तेमाल सरकार लोगों की जासूसी कराने के लिए कर रही है.

विपक्ष के हंगामे के बीच मंगलवार को केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का बयान सामने आया है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. जो इस ऐ को नहीं रखना चाहता वो अपने फोन से इसे अन्य एप्स की तरह अनइंस्टॉल कर सकते हैं. तो वहीं सिंधिया का बयान सामने आने के बाद विपक्ष इसे सरकार का यूटर्न बता रही है.  तो वहीं सोशल मीडिया पर सिंधिया का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह कह रहे हैं कि अगर आप नहीं चाहते हैं तो इस ऐप को डिलीट भी कर सकते हैं. विपक्ष हमेशा मुद्दे ढूंढता रहता है. सरकार सभी भ्रमों को तोड़ना चाहती है. जबकि इस ऐप के जरिए जनता की सुरक्षा बढ़ रही है. 

जानें क्या है संचार साथी ऐप का पूरा मामला?

दरअसल हाल ही में भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन ने 28 नवंबर को एक निर्देश जारी किया है और स्मार्टफोन निर्माताओं और आयातकों को कहा है कि कंपनियां यह सुनिश्चित करें कि भारत में उपयोग के लिए निर्मित या आयात हो रहे सभी मोबाइल हैंसेट्स पर संचार साथी प पहले से इंस्टॉल हो. यानी इसके फंक्शन डिसेबल या रिस्ट्रिक्टेड न हों. इसी के साथ ही निर्देश में ये भी कहा गया है कि जो फोन पहले से बन चुके हैं उनमें सॉफ्टवेयर अपडेट द्वारा इस प को डालने की कोशिश की जाए. बता दें कि निर्देश में सरकार की इन बातों को मानने के लिए कंपनियों को 90 दिन का वक्त दिया गया है. यही नहीं 120 दिनों के अंदर इसके लागू होने से संबंधित रिपोर्ट भी पेश करने के निर्देश दिए गए हैं. संचार साथी मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के रूप में उपलब्ध है.

जानें क्या है सरकार का दावा?

दरअसल इस ऐप को लेकर दूरसंचार विभाग का दावा है कि संचार साथी डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन्स की एक नागरिक केंद्रित पहल है और इसका मकसद मोबाइल सब्सक्राइबर्स को मजबूत बनाना है. इसी के साथ ही ये भी दावा किया गया है कि उपभोक्ताओं को इस ऐप की मदद से सुरक्षा को मजबूत करना और सरकार की नागरिक को लिए की जाने वाली पहलों के बारे में जागरूकता को बढ़ाना है.

यही नहीं ये ऐप व पोर्टल नागरिकों को कई सेवाएं भी उपलब्ध करा रहा है. मसलन टेलीकॉम और इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी और कीप योरसेल्फ अवेयर सुविधा एंड यूजर सिक्योरिटी से सम्बंधित कई बिंदुओं पर लेटेस्ट अपडेट और जागरूकता सामग्री भी उपलब्ध होगी.

सरकार का दावा है कि इससे लोगों को इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी नंबर ( IMEI) के जरिए से मोबाइल हैंडसेट की वास्तविकता जांचने में सक्षम बनाता है. मसलन अगर आपके साथ कोई ऐसी घटना हो जिससे आपको महसूस हो कि आपके साथ धोखाधड़ी हुई है तो आप इस संचार साथी की मदद से रिपोर्ट कर सकते हैं.

सरकार का दावा ये भी कि इस ऐप के जरिए लोगों को साइबर फ्रॉड से भी बचने में मदद मिलेगी. मसलन अगर आपका फोन चोरी हो जाता है तो इस प के जरिए आपके फोन की आसानी से ट्रैकिंग हो सकती है.

मोबाइल चोरी होने पर आप संचार साथी पर इसकी रिपोर्ट दर्ज कर सकते हैं. यहां से साइबर सेल आपके फोन को ट्रैक करेगा. इसमें भी संचार साथी उनकी मदद करेगा.

यही नहीं ये ऐप आपके नाम पर चल रहे मोबाइल कनेक्शन की जांच भी कर सकता है. इससे बैंकों/वित्तीय संस्थानों के विश्वसनीय संपर्क विवरण आदि की भी सहूलियत मिलेगी.

अब तक क्या हुआ फायदा?

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि 17 जनवरी 2025 को संचार साथी मोबाइल ऐप लॉन्च हुआ तो वही इससे पहले पोर्टल जारी हुआ था. अगर सरकार के आंकड़ों को देखें तो अगस्त 2025 तक इसके 50 लाख से ज्यादा डाउनलोड हो चुके थे. तो वहीं सरकार का दावा है कि संचार साथी लाइव डैशबोर्ड से 37 लाख 28 हजार से अधिक चोरी/खोए हुए मोबाइल उपकरणों को सफलतापूर्वक ब्लॉक किया जा चुका है. इसके अलावा 22 लाख 76 हजार से अधिक उपकरणों का पता लगाया गया. 

सरकार का ये भी दावा है कि संचार साथी पोर्टल की मदद से अब तक 3 करोड़ से अधिक धोखाधड़ी वाले मोबाइल कनेक्शन्स को खत्म किया जा चुका है. 3 लाख 19 हजार डिवाइस ब्लॉक कर दिए गए हैं, 16 लाख 97 हजार व्हाट्सएप अकाउंट निष्क्रिय कर दिए गए हैं साथ ही 20,000 से अधिक बल्क एसएमएस भेजने वालों को ब्लैकलिस्ट भी किया जा चुका है. इस तरह से दूरसंचार संबंधी धोखाधड़ी पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सका है. 

जानें क्या है आईएमईआई नंबर जांचने से हमारा फायदा?

बता दें कि साइबर सुरक्षा के लिए फर्जी या नकली आईएमईआई वाले मोबाइल हैंडसेट गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं. इसे कुछ इस तरह समझा जा सकता है, माना कि कोई फोन चोरी हुआ और उस फोन का आईएमईआई नंबर नकली था. तो जब इस फोन को ट्रैक करने कोशिश हुई तो अलग-अलग जगहों पर एक ही आईएमईआई नंबर वाले एक से अधिक हैडसेट सक्रिय पाए गए क्योंकि नकली आईएमईआई के एक नंबर से कई-कई फोन बाजार में उपलब्ध हैं. इस तरह से सही फोन को ट्रैक करना एक बड़ी चुनौती बन जाता है.

चूंकि सेकेंड-हैंड मोबाइल उपकरणों का बड़ा बाजार भारत में मौजूद है. तो इस तरह के मामले भी देखे गए हैं कि इनमें गुमशुदा, चोरी या फिर ब्लैकलिस्ट किए गए उपकरण फिर से यानी दोबारा बेचे जा रहे हैं. इस तरह की स्थिति में इन मोबाइलों को खरीदने वाला भी अपराध का हिस्सा बन जाता है और उसे आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है. तो वहीं संचार साथी ऐप ब्लॉक/प्रतिबंधित सूची में डाले गए आईएमईआई की जांच आसानी से कर देता है.

यहां बता दें कि आईएमईआई नंबर उस नंबर को कहते हैं जो आपके फोन को एक अलग पहचान देता है. प्रत्येक मोबाइल फोन का एक यूनिक आईएमईआई नंबर होता है. इसका साफ मतलब है कि यदि आपका आईएमईआई नंबर असली हो तो वो सबसे हटके होगा, यानी यूनीक होगा.

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