इस घटना के बाद से ही अधिवक्ता सवाल कर रहे हैं कि क्या सड़क पर खड़े होना भी गुनाह है या फिर सड़क सम्बधित दुकानदार ने बनवाई.

न पूछो प्यास मिट्टी की, जो बरसें प्रेम की बूंदें, चटकती भूमि के भीतर मिलन की भोर हो जाए…” सुनाकर श्रोताओं को तालियां बजाने के लिए मजबूर कर दिया.