UP Crime News: सुनारों को निशाना बनाकर देश भर में लूटपाट मचाने वाले उड़ीसा के चार लूटेरे गिरफ्तार, 16 दिन में 6 वारदातों को दिया अंजाम
लखनऊ। प्रदेश भर में सुनारों को अपना निशाना बनाने वाले गिरोह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरोह ने मात्र 16 दिन में प्रदेश के तमाम हिस्सों से सुनारों सहित कई लोगों को अपना निशाना बनाया था।
गुडंबा पुलिस ने सोमवार को उड़ीसा के इस गिरोह का भांडाफोड़ किया है और चार बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है। चारों बदमाश उड़ीसा के रहने वाले हैं। बीते 16 दिन में उड़ीसा, प्रयागराज, लखनऊ और कानपुर में छह लूट की वारदातों को अंजाम दे चुके हैं। जानकारी मिली है कि इन्हीं बदमाशों ने चार दिन तक रेकी करके 13 दिसंबर को गुडंबा के मिश्रपुर गांव में सर्राफ नरेश सिंह से 12 लाख रुपये कीमत के जेवर लूटे थे।
इसके बाद फायरिंग करते हुए भाग निकले थे। डीसीपी उत्तरी सैयद मो. कासिम आब्दी ने बताया कि गिरफ्तार बदमाशों में उड़ीसा के जाजपुर कलिंगा नगर के दसमणिया गांव का रहने वाला दीपक प्रधान, भोला प्रधान, अर्जुन प्रधान और गंजाम जनपद के असका शाहपुर दुमकुड़ी का रहने वाला आर्यन प्रधान है। उक्त बदमाशों के पास से लूट के जेवर, पिस्टल, चार कारतूस और एक बाइक बरामद की गई है।
शातिह हैं गिरोह के लोग
इंस्पेक्टर आलोक कुमार राय ने बताया कि चारों बदमाश उड़ीसा से छह दिसंबर को चले थे। इसके पहले वहां पर एक ज्वैलर्स से लूट की थी। इसके बाद रांची के रास्ते प्रयागराज पहुंचे। प्रयागराज में लूट की। लखनऊ में आए चिनहट में ओएलएक्स के माध्यम से एक कमरा बुक कराया। वहां पर 10 दिसंबर से रुके थे। 11 दिसंबर को रेकी करने के बाद गुडंबा में पेट्रोल पंप के पास सर्राफ नरेश को टारगेट किया। 12 दिसम्बर को भी उनके पीछे पहुंचे और सारा दिन उस पर नजर रखी। नरेश के मिश्रपुर गांव स्थित घर तक पीछा किया पर वहां शादी थी।
इसलिए वारदात को अंजाम देने का मौका नहीं मिला। इसके बाद 13 को पहुंचे और नरेश के घर की गली तक पीछा किया फिर मौका देखकर वारदात की और फायरिंग करते हुए भाग निकले। यहां से भागकर प्रयागराज पहुंचे। वहां पर एक लूट की। फिर कानपुर चले गए। कानपुर में 22 दिसंबर को नौबस्ता में वारदात की। इसके बाद चकेरी मंगला विहार में लूट की। यह लोग फिर लखनऊ पहुंचे और यहां चिनहट में एक सुनार को टारगेट किया था। उसकी रेकी करने में वाहन चेकिंग के दौरान पकड़े गए।
बाइक से पहुंचे लुटेरे
पुलिस ने बताया कि लुटेरे उड़ीसा से रांची तक दो बाइकों पर पहुंचे। यह बाइक भी लूट के रुपयों से खरीदी थीं। इसके बाद रांची से ट्रक पर बाइक लादकर लखनऊ आए थे। बाइक की नंबर प्लेट यहां बदल ली थी। पकड़े न जाएं इसलिए यह लोग लूट का माल सुनारों को नहीं बेचते थे। लूट का माल राह चलते लोगों को बेच देते थे और फिर खुद भाग निकलते थे।