UP Crime News: नहीं चली वकालत तो बन बैठा फर्जी जज, शादी का झांसा देकर ठगने लगा महिलाओं को, देखें किन महिलाओं को करता था टारगेट, बार एसोसिएशन ने रद्द की सदस्यता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कानपुर के नवाबगंज से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। एक अधिवक्ता की वकालत नहीं चली तो खुद को फर्जी जज बना लिया और फिर महिलाओं को टारगेट करने लगा। विष्णुशंकर गुप्ता नाम के अधिवक्ता पर आरोप है कि वह खुद को जज बताकर महिलाओं को शादी का झांसा देकर ठगी करता था। इस पर कानपुर बार एसोसिएशन ने उसकी सदस्यता भी रद्द कर दी है।
तलाकशुदा और विधवा महिलाओं को करता था टारगेट
विष्णुशंकर के निशाने पर तलाकशुदा और विधवा महिलाएं रहती थीं। वह समाचारपत्रों में तलाकशुदा और विधवा महिलाओं के पुर्नविवाह का विज्ञापन देकर खुद को जज बताते हुए उनके नंबर पर फोन कर दोस्ती करता था। इसके बाद शादी का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये ऐंठता था। इसके बाद मोबाइल नम्बर बंद कर चंपत हो जाता था। फिलहाल साइबर क्राइम सेल की टीम ने बुधवार को आरोपित विष्णुशंकर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। करीब 20 महिलाओं को फंसाकर विष्णुशंकर ने धोखाधड़ी की। उसके पास से चार लाख रुपये, जेवर और सरकारी कार्यालय की मुहर आदि बरामद की गई हैं। यह जानकारी डीसीपी सेंट्रल अपर्णा रजत कौशिक ने दी।
इस तरह पकड़ा पुलिस ने
साइबर क्राइम सेल प्रभारी रणजीत राय ने बताया कि आरोपित के खिलाफ बीते जनवरी महीने में मुकदमा दर्ज हुआ था। उसने एक विधवा महिला को फंसाया था, जिसने उससे शादी का विज्ञापन देखकर सम्पर्क किया था। इस विज्ञापन में विष्णुशंकर ने खुद को जज बताया था। महिला ने उसकी झूठी बात को सही समझा और फिर उससे सम्पर्क किया। इस पर वह महिला से मिलने-जुलने लगा। भरोसे में लेकर महिला को होटल ले गया। जहां दुष्कर्म किया।
भविष्य की प्लानिंग के सपने दिखाकर झांसे में लेकर कई बार में कुल 44 लाख रुपये और करीब पांच लाख के जेवर ऐंठे थे। इसके बाद मोबाइल बंद कर फरार हो गया। पीड़िता की तहरीर पर आरोपित को पकड़ने के लिए उन्हीं नम्बरों का इस्तेमाल किया गया, जिसे वह फर्जी शादी का विज्ञापन में प्रकाशित करता था। आरोपित विष्णुशंकर ने फिर एक-दो महिलाओं को फोन कर झांसे में लेकर बातचीत करने लगा। दारोगा शिशिर यादव, सिपाही अखिलेश पटेल, हरि किशोर व अन्य की मदद से आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया।
पत्नी से ले चुका है तलाक
साइबर क्राइम सेल के एक्सपर्ट फिरोज बदर ने बताया कि विष्णुशंकर गुप्ता का उसकी पत्नी से तलाक हो गया था। इसके बाद उसने जालसाजी शुरू की। उसने अपनी पत्नी और ससुरालीजन को फंसाने के लिए भी खुद के अपहरण की झूठी कहानी रची थी। इस मामले में विष्णुशंकर के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ था। इसी के बाद अप्रैल 2021 में कानपुर बार एसोसिएशन ने विष्णुशंकर को डीबार करते हुए उसकी आजीवन सदस्यता रद्द कर दी थी। विष्णुशंकर के खिलाफ पांच मुकदमे दर्ज हैं।