UP Basic Shiksha: BLO ड्यूटी को लेकर वायरल हो रहा डीजी विजय किरन आनन्द का टेक्स्ट मैसेज वाला निर्देश, बेसिक शिक्षकों ने मानने से किया इंकार, खड़े किए सवाल, मामले पर डीजी ने भी नहीं दिया कोई रिप्लाई, जानें क्या लिखा है निर्देश में

October 6, 2022 by No Comments

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लखनऊ। सोशल मीडिया पर एक निर्देश तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनन्द का निर्देश बताया जा रहा है, लेकिन शिक्षकों को दिया गया ये निर्देश अधिकारी के किसी पत्र (विभागीय अधिकारिक लेटर हेड पत्रांक सहित) के माध्यम से नहीं बल्कि व्हाट्सअप के टेक्स्ट मैसेज के जरिए दिया गया है, जिसमें डीजी के नाम का जिक्र तक नहीं किया गया है। इस पर शिक्षकों का कहना है कि डीजी तो पत्र के जरिए ही निर्देश देते हैं। ऐसे में कैसे समझा जाए कि यह उनकी ही निर्देश है। हालांकि इस निर्देश के बारे में डीजी से व्हाट्सअप मैसेज के जरिए पुष्टि करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया।

दरअसल जो निर्देश सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, उसके बारे में शिक्षकों द्वारा कहा जा रहा है कि डीजी द्वारा पत्र के जरिए ही सारे निर्देश दिए जाते रहे हैं। ऐसे में ये कैसे मान लें कि ये निर्देश डीजी के स्तर से आया है, क्योंकि इस निर्देश में कहीं भी उनके नाम का जिक्र तक नहीं हुआ है। इसी के साथ शिक्षकों ने ये भी सवाल खड़ा किया है कि व्हाट्सअप टेक्स्ट मैसेज को अक्सर लोग एडिट करके कुछ का कुछ कर देते हैं। ऐसे में जो मैसेज डीजी का बताकर शिक्षकों के ग्रुप्स में वायरल हो रहा है, वह उन्हीं का है, या नहीं, ये कैसे समझा जाए। शिक्षकों का कहना है कि तमाम बार ऐसा होता है कि टेक्स्ट मैसेज को लोग एडिट कर देते हैं। ऐसे में डीजी के वायरल मैसेज की अधिकारिक पुष्टि भला कैसे होगी। बता दें कि इसी तरह का सवाल डीजी विजय किरन आनन्द से किया गया, लेकिन उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया।

जानें क्या लिखा है निर्देश में
वायरल निर्देश में लिखा है, समस्त BSAs एवं BEOs ध्यान दीजिए:-
“मेरे द्वारा यह निरंतर देखा जा रहा है कि BEOs के ग्रुप में नकारात्मक टिप्पणियां एवम भ्रामक सूचनाएं फैलाने की एक प्रवृत्ति सी बन गई है । इसमें कुछ लोगों द्वारा अधिक सक्रिय भूमिका निभाई जा रही है तथा अनावश्यक दूसरों को उकसाने एवं भड़काने का प्रयास भी किया जा रहा हैं । इन सभी की निगरानी की जा रही है और मेरे द्वारा ऐसे लोगों को चिन्हित भी किया जा रहा है । भविष्य में यदि ऐसी भ्रामक सूचनाएं या किसी तरह की अनावश्यक टिप्पणी ग्रुप में पोस्ट की गई , तो सर्वसंबंधित का उत्तरदायित्व भी निर्धारित किया जाएगा।

इस प्रकार की अनुशासनहीनता कदापि बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यह अंतिम बार अवगत कराया जा रहा है कि यदि किसी को कोई परेशानी है तो मुझसे संपर्क किया जाए । समस्याओं का त्वरित हल करने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है । यदि कोई विशेष अवरोध है , मनोबल को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने वाली बात दिमाग में आ रही है , चाहे वह व्यक्तिगत हो या शासकीय कार्यक्षेत्र से सम्बन्धित हो, हमारे दरवाजे आपके लिए सदैव खुले हैं । हम सभी द्वारा यह कोशिश की जा रही है कि एक अच्छे माहौल में आपको कार्य करने का अवसर मिले और विशेषकर अकादमिक और प्रशासनिक कार्यों में आपको ज्यादा से ज्यादा मानव संसाधन उपलब्ध हो सके, जिससे कि आप उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें और एक कीर्तिमान हासिल कर सकें ।

वायरल निर्देश को डीजी विजय किरन आनन्द के व्हाट्स नम्बर पर भेज कर कन्फर्म करने की कोशिश की गई, लेकिन डीजी की ओर से कोई रिप्लाई नहीं आया

तत्क्रम में निम्नलिखित बिंदुओं के सम्बन्ध में आपका ध्यान आकृष्ट करना है :

(1) BLO के कार्य हेतु शिक्षकों द्वारा अनुपस्थित रहने की बात है तो यह बार-बार स्पष्ट किया जा चुका है और अब अंतिम बार बताया जा रहा है कि किसी भी हालत में स्कूल अवधि के दौरान कोई भी शिक्षक स्कूल से बाहर नहीं रहेंगे। BLO का जो भी कार्य है , वह स्कूल अवधि के पश्चात किया जाएगा। किसी भी BSA एवं BEO द्वारा BLO कार्य के लिए प्रतिकर अवकाश स्वीकृत नहीं किया जायेगा। यदि कहीं भी प्रशासन स्तर पर मुझे या मेरी टीम को बात करनी है तो अवगत कराया जाय , मैं स्वयं जिलाधिकारी एवं सीडीओ से वार्ता करूंगा ।

(2) वाहन अथवा किसी अन्य प्रकार की सुविधा जो परियोजना द्वारा उपलब्ध कराई गई है, उसमें जनपद लेवल पर क्रियान्वयन हेतु समस्या आ रही है , तो तत्काल हमें अवगत कराना सुनिश्चित करें । समस्त समस्याओं को हल कराने की जिम्मेदारी हमारी है , निश्चय ही उसको हल कराएंगे।

(3) कायाकल्प, मानव संपदा, निपुण भारत, समर्थ एवं शारदा अभियान की जरूरत और महत्ता को समझें । यह दो करोड़ बच्चों को अवसर की समता प्रदान करने तथा एक लाख तैंतीस हजार स्कूलों में अवस्थापना सुविधाओं को संतृप्त करने की बात है , आउट ऑफ स्कूल और हमारे दिव्यांग बच्चों को शिक्षा का अधिकार देने की बात है, 6.24 लाख शिक्षकों को पारदर्शी व्यवस्था देने की बात है। यदि यह कार्य हम सभी सकारात्मक सोच के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए नहीं करेंगे तो यह दुर्भाग्यपूर्ण रहेगा।

आज विजयदशमी के इस पावन अवसर पर हम सभी संकल्प लेते हैं कि बुराई पर अच्छाई की विजय प्राप्त करते हुए निरंतर आगे बढ़ेंगे और हमेशा अपने मनोबल को ऊंचा रखेंगे ताकि आपको देखकर अन्य लोगों में भी उत्साह और उमंग पैदा हो। आप सब मुझे रिटर्न पोस्ट के माध्यम से अवगत कराएं कि आप इस अभियान के अमूल्य अंग हैं और इस अभियान की ताकत बनेंगे।

धन्यवाद !”
इस तरह का निर्देश वायरल है, लेकिन इस पूरे निर्देश के बीच में कहीं भी डीजी विजय किरन आनन्द के नाम का जिक्र नहीं है। “मैं” का सम्बोधन है, लेकिन “मैं” कौन है। इस पर शिक्षक सवाल खड़े कर रहे हैं। बता दें कि जैसा व्हाट्सअप पर टेक्स्ट निर्देश चल रहा है, अक्षरश: वही यहां दिया गया है। इसमें जरा भी एडिटिंग नहीं की गई है।

जानें क्या है नियम
बता दें कि नियमानुसार किसी भी सरकारी विभाग में जब किसी अधिकारी द्वारा किसी निर्देश को जारी किया जाता है तो वह सम्बंधित के पत्र, जिस पर उनका नाम, मोहर और विभाग का नाम, पत्रांक आदि अंकित होता है। इसी को अधिकारिक पत्र माना जाता है।